By अनन्या मिश्रा | May 02, 2025
ममलेश्वर मंदिर
पौराणिक कथा
शिवपुराण के मुताबिक एक बार मां पार्वती ने स्नान करने से पहले उबटन लगाया और फिर उबटन उतारकर हल्दी का एक पुतला बनाया। इस पुतले में उन्होंने प्राण डाल दिए और इस तरह से भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। मां पार्वती स्नान करने से पहले गणेश को द्वारपाल बनाकर चली गई थीं। उन्होंने आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति अंदर न आ पाए और कुछ समय बाद वहां पर भगवान शिव आए और उन्होंने द्वारपाल बने गणेश जी से मां पार्वती से मिलने की बात कही।
लेकिन मां पार्वती आदेशानुसार गणेश जी ने भगवान शिव को अंदर जाने से मना कर लिया। जिस पर भोलेनाथ को क्रोध आ गया और उन्होंने अपने पुत्र से युद्ध करना शुरूकर दिया। लंबे समय तक युद्ध करने के बाद महादेव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया।
फिर जब मां पार्वती बाहर आईं, तो उन्होंने गणेश जी को देखा तो वह रोने लगीं। जिस पर मां पार्वती ने कहा कि यदि उनके पुत्र को जीवित नहीं किया गया तो वह प्रलय ला देंगी। इससे सभी देवतागण परेशान हो उठे और सभी ने मां पार्वती को शांत करने की कोशिश की। तब महादेव ने गरुड़ को आदेश दिया कि वह उत्तर दिशा में जाएं और जो भी मां अपने बच्चे की ओर पीठ करके बैठी हो उसका सिर ले आएं।
भगवान शिव का आदेश मानकर गरुड़ आकाश में उड़ गए और वह काफी समय तक तलाश करते रहे। अंत में उनको एक हथिनी दिखाई दी, जिसके बच्चे का सिर लेकर वह आए। तब भगवान शिव ने गणेश जी के धड़ पर हाथी के बच्चे का सिर रखकर उसको पुनर्जीवित कर दिया।
अमरनाथ यात्रा में इस मंदिर भूमिका
पहलगाम स्थित इस मंदिर का अमरनाथ यात्रा से काफी गहरा संबंध है। अमरनाथ में बर्फ के शिवलिंग की पूजा की जाती है और इस गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पहलगाम से अपनी यात्रा की शुरूआत करते हैं। ममलेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद आगे बढ़ा जाता है।