मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने और कूटनीति को विफल बताने वालों को यह रिपोर्ट देखनी चाहिए

By नीरज कुमार दुबे | Mar 31, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने वाले और मोदी की विदेश नीति को विफल बताने वाले विपक्षी नेताओं को यह देखना चाहिए कि जब भारत के सामने ऊर्जा संकट मंडराया तो दुनिया के वही देश मदद के लिए खड़े हो गए जिनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों तक भरोसे का रिश्ता बनाया था। खासकर अफ्रीकी देशों से बढ़ते आयात ने यह साबित कर दिया है कि भारत ने समय रहते अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाया था। आज वही रिश्ते और रणनीतिक फैसले भारत की ढाल बनकर खड़े हैं और यही असली कूटनीति की ताकत है।

इसे भी पढ़ें: PM Modi ने Koba तीर्थ से देश को दिए 9 Sankalps, पानी बचाने से लेकर प्राकृतिक खेती तक का आह्वान

आज स्थिति यह है कि भारत में कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता एक महीने पहले की तुलना में काफी बेहतर हो चुकी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी प्रकार की ऊर्जा की कमी नहीं है और पेट्रोल, डीजल तथा रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुचारु बनी हुई है। यह कोई संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित रणनीति का परिणाम है।

देखा जाये तो सबसे बड़ा बदलाव आया है ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण में। एक दशक पहले तक भारत केवल 27 देशों से कच्चा तेल लेता था, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 41 हो चुकी है। इसका सीधा मतलब है कि भारत अब किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। अमेरिका, रूस, कनाडा, नार्वे से लेकर अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया, अल्जीरिया और अंगोला तक भारत ने अपने ऊर्जा संबंधों का विस्तार किया है। एलएनजी के लिए कैमरून, इक्वेटोरियल गिनी और मोजाम्बिक जैसे नए साझेदार जुड़े हैं।

यही नहीं, रणनीतिक भंडारण की दिशा में भी भारत ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। पिछले 11 वर्षों में 5.3 मिलियन टन का रणनीतिक तेल भंडार तैयार किया गया है और अतिरिक्त क्षमता पर तेजी से काम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत के पास आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।

मोदी सरकार ने केवल आपूर्ति बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि प्रबंधन को भी मजबूत किया। चौबीसों घंटे निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया और एक अंतर मंत्रालयी समूह रोज बैठक कर हालात का आकलन कर रहा है। जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए और राज्यों को आवश्यक वस्तुओं की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया।

यहां सबसे महत्वपूर्ण पहलू है कूटनीतिक सक्रियता। प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, ईरान और अमेरिका जैसे देशों के नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हुई और आपूर्ति बाधित नहीं हुई। यह वही देश हैं जिनसे भारत ने संकट के समय पहले भी सहयोग किया था और आज वही रिश्ते काम आए।

सामरिक दृष्टि से देखें तो यह पूरी स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति की बड़ी परीक्षा थी। पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ सकता था, लेकिन भारत ने अपनी निर्भरता घटाकर इस खतरे को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया। अब होर्मुज मार्ग पर निर्भरता घटकर लगभग तीस प्रतिशत रह गई है।

इसके रणनीतिक निहितार्थ और भी गहरे हैं। भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा कूटनीति का सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है। अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में बढ़ती मौजूदगी भारत को दीर्घकालिक सुरक्षा देती है। साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस जैसे विकल्पों को बढ़ावा देकर एलपीजी पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम हो रहा है।

आम जनता पर इसका सकारात्मक असर साफ दिख रहा है। रसोई गैस की आपूर्ति जारी है, भले ही घबराहट में बुकिंग बढ़ने से डिलीवरी में चार से पांच दिन का समय लग रहा हो, लेकिन कहीं भी गैस खत्म होने की खबर नहीं है। किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और पेट्रोल, डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है।

यह पूरा घटनाक्रम एक बात साफ करता है कि मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल नीतिगत मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा माना है। आज जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं तब भारत मजबूती से खड़ा है।

बहरहाल, विपक्ष को यह समझना होगा कि विदेश यात्राएं केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं होतीं, बल्कि संकट के समय काम आने वाले रिश्ते बनाने के लिए होती हैं। और जब संकट आया, तो वही रिश्ते भारत के लिए कवच बन गए। यही है नई भारत की आक्रामक, आत्मविश्वासी और दूरदर्शी कूटनीति।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

China Open Badminton: PV Sindhu का सफर थमा, Chen Yufei ने 90 मिनट चले कांटे के मुकाबले में दी मात

अमेरिका यूक्रेन में निरर्थक जंग समाप्त करने में मदद के लिए तैयार, लेकिन समझौता आसान नहीं: मार्को रूबियो

अल्फाबेट ने रचा इतिहास: AI और Cloud के दम पर Google की पेरेंट कंपनी को $112.1 Billion का रिकॉर्ड लाभ

Red Sea में Tension के बीच Crude Oil $100 के पार, Global Market में बढ़ी महंगाई की चिंता