Madhya Pradesh Temples: दतिया की पीतांबरा पीठ सहित ये 3 बगलामुखी मंदिर, दर्शन से दूर होते हैं सारे कष्ट

By अनन्या मिश्रा | Oct 14, 2025

भारत की आध्यात्मिक धरा पर कई ऐसे शक्तिपीठ और मंदिर हैं। जिनका सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही महत्व नहीं बल्कि ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिहाज से भी अद्वितीय हैं। इन मंदिरों में दूर-दूर से माता रानी के दर्शन के लिए लोग पहुंचते हैं। ऐसे में कोई वैष्णों देवी मंदिर जाता है, तो कोई शक्तिपीठ की योजना बना रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी माता रानी के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बगलामुखी माता के मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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भारत में मां बगलामुखी के मंदिर

भारत में बगलामुखी के 3 ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनमें पीतांबरा पीठ मध्यप्रदेश के दतिया में,  नलखेड़ा, मध्यप्रदेश (लखुंदर नदी के किनारे) और तीसरा हिमाचल प्रदेश में हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में माता बगुलामुखी को 10 महाविद्याओं में 8वां स्थान मिला हुआ है।

बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे तीन मुख वाली मां बगलामुखी का मंदिर मौजूद है। माना जाता है कि यह मंदिर महाभारत के समय का है। माना जाता है कि पांडवों ने महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए साधना की थी। बगलामुखी माता के दरबार में कई बड़े-बड़े राजनेता दर्शन के लिए आते हैं। पहले माता को देहरा के नाम से जानते हैं और यहां पूजा में पीले रंग के फूल और पीले रंग की पूजन सामग्री का खास महत्व है। बगलामुखी मां की पूजा में हल्दी और पूजन सामग्री का भी इस्तेमाल किया जाता है।

बगलामुखी माता दतिया

मध्य प्रदेश के दतिया में मां बगुलामुखी का मंदिर पीताम्बरा पीठ के नाम से पूरी दुनिया में फेमस है। यह शक्तिपीठ शत्रुनाश और राजसत्ता की अधिष्ठात्री देवी पीताम्बरा देवी को समर्पित है। यहां पर भक्त देवी बगुलामुखी के रूप में पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में पीताम्बरा माता के साथ खंडेश्वर महादेव और धूमावती देवी के भी दर्शन किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि साल 1935 में दतिया के नरेश के सहयोग से स्वामीजी महाराज ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। मां बगलामुखी और धूमावती की प्रतिमाओं के अलावा मंदिर परिसर में काल भैरव, परशुराम, हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

बगलामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में मौजूद मां बगलामुखी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यहां पर मत्था टेकने से भक्तों की सभी परेशानियां दूर होती हैं और कोर्ट कचहरी के मामलों से भी छुटकारा मिलता है। इस मंदिर में आम लोगों से लेकर नेता और सेलिब्रिटी भी आते हैं। मंदिर के साथ प्राटीन शिआवली में शिवलिंग स्थापित है और लोग मां के दर्शन के बाद जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि यहां पर मां हल्दी रंग के जल से प्रकट हुई थी। इस वजह से मां को पीतांबरा देवी कहते हैं। मां को पीला रंग काफी ज्यादा प्रिय है और मां के पूजन में पीले रंग की सामग्री का इस्तेमाल होता है।

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