Tibet में फंसे Indian Pilgrims वैकल्पिक Zhangmu मार्ग से नेपाल लौटे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 29, 2026

के जे एम वर्मा बीजिंग, 29 अगस्त तिब्बत में भारी संख्या में फंसे भारतीय तीर्थयात्रियों की शनिवार को एक वैकल्पिक सीमा मार्ग से नेपाल वापसी शुरू हुई। बाढ़ के कारण ग्यिरोंग सीमा चौकी नष्ट हो गई। ग्यिरोंग-नेपाल सीमा चौकी, नेपाल के रास्ते तिब्बत में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने का मुख्य मार्ग है।

फंसे हुए तीर्थयात्रियों ने झांगमु सीमा चौकी के रास्ते नेपाल में प्रवेश करना शुरू कर दिया, जिसे इस क्षेत्र में आए भूकंप और भूस्खलनों के कारण पहले बंद कर दिया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी उन भारतीय तीर्थयात्रियों में शामिल थे, जो शनिवार को झांगमु के रास्ते नेपाल सीमा पर लौटे। रेड्डी ने यहां सीमा चौकी की ओर जाते समय ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं देख सकता हूं कि कई बस और वाहन झांगमु सीमा चौकी के रास्ते नेपाल की ओर जा रहे हैं।’’ रेड्डी हैदराबाद से गए 31 सदस्यों वाले एक समूह का हिस्सा थे, जो 23 अगस्त को तिब्बत गया था।

उन्होंने ग्यिरोंग-नेपाल सीमा के रास्ते तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश किया था और शुक्रवार को उसी मार्ग से लौटने वाले थे। इससे पहले, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया था कि ग्यिरोंग काउंटी से निकाले गए 1,000 लोगों में 555 पर्यटक शामिल थे। रेड्डी ने बताया कि बुधवार को जब वह और उनका परिवार हजारों अन्य लोगों के साथ पवित्र कैलाश पर्वत की ‘परिक्रमा’ कर रहे था, तब उन्हें अचानक आई बाढ़ की खबर मिली।

उन्हें दूतावास के अधिकारियों के जरिए ग्यिरोंग-नेपाल सीमा चौकी पर आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बारे में जानकारी दी गई। रेड्डी ने कहा कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील—जो ग्यिरोंग से 700 किलोमीटर दूर हैं—अचानक आई बाढ़ से प्रभावित नहीं हुए।

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