भारतीय भाषा और संस्कृति में तिलक का विश्वास नई शिक्षा नीति में झलकता है: अमित शाह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 01, 2020

नयी दिल्ली।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का विश्वास हाल ही में जारी नई शिक्षा नीति में झलकता है। ‘लोकमान्य तिलक- स्वराज से आत्मनिर्भर भारत तक’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के माध्यम से तिलक के विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में भारत, भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं के तिलक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। शाह ने कहा, ‘‘भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति में लोकमान्य तिलक का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नयी शिक्षा नीति में झलकता है।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति, 2020 को मंजूरी दी थी जिसमें स्कूली और उच्च शिक्षा में आमूल-चूल बदलाव के प्रावधान हैं। लोकमान्य तिलक की सौवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने यहां वेबिनार का आयोजन किया। शाह ने कहा कि तिलक का प्रसिद्ध सूत्रवाक्य था कि सच्चे राष्ट्रवाद की बुनियाद संस्कृति और परंपराओं की आधारशिलाओं पर रखी होती है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी सुधार यदि हमारे अतीत की अनदेखी करता है या उसका अपमान करता है तो सच्चे राष्ट्रवाद को समझने में मदद नहीं मिल सकती।’’ गृह मंत्री ने कहा कि तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सच्चे अर्थों में पूर्णता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई थी और इसमें बेजोड़ योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि तिलक का यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा ‘‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे पाकर रहूंगा।’’ 

इसे भी पढ़ें: लोकमान्य तिलक की 100वीं पुण्यतिथि पर PM मोदी ने किया नमन, कहा- उनका स्वराज का विचार करता है प्रेरित

शाह ने कहा कि तिलक के इस नारे ने भारतीय समाज में जागरण किया और स्वतंत्रता संघर्ष को जन आंदोलन बना दिया जिसकी वजह से उनका नाम लोकमान्य तिलक पड़ गया। उन्होंने कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति के गौरवपूर्ण इतिहास को जानना है तो तिलक के लेखन को समझना होगा। उनकी साहित्यिक कृतियों को पढ़ने से युवाओं को उनके महान व्यक्तित्व का ज्ञान होगा। कामकाजी वर्ग को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में तिलक के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि तिलक ने लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने के लिए शिवाजी जयंती और गणेशोत्सव मनाना शुरू किया था जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा ही बदल दी।

प्रमुख खबरें

SEBI Order के खिलाफ SAT पहुंचे Zee Entertainment और Punit Goenka, बुधवार को होगी अहम सुनवाई

Lionel Messi को चैंपियन बनाने वाले पिता Jorge Messi का निधन, दिग्गज Rafael Nadal ने जताया गहरा शोक

Aston Villa छोड़ PSG लौटे Lucas Digne, 11 साल बाद फिर पहनेंगे पेरिस की जर्सी, 2029 तक हुआ Deal साइन

5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal