By मिताली जैन | Apr 27, 2025
खाना सीधे तौर पर हमारी सेहत से जुड़ा है। अमूमन लोग अपनी हेल्थ का ख्याल रखते हुए भोजन करते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग इमोशनल ईटिंग से जूझते हैं, फिर चाहे वो तनाव में स्नैकिंग करना हो, दुखी होने पर कंफर्ट फूड खाना हो, या बोरियत के कारण कुछ भी खाना हो। कभी-कभी ऐसा लगता है कि लोग अपने इमोशन को मैनेज करने के लिए खाने को रास्ता बनाते हैं।
ट्रिगर्स की करें पहचान
अगर आप इमोशनल ईटिंग से बचना चाहते हैं तो ऐसे में आप सबसे पहले ट्रिगर्स की पहचान करें। आपको सबसे पहले यह पहचानना होता है कि आप कब भावनात्मक रूप से खा रहे हैं। क्या आप इसलिए खा रहे हैं क्योंकि आप तनावग्रस्त, बोरियत, चिंतित या दुखी हैं? एक बार जब आप ट्रिगर की पहचान कर लेते हैं, तो आप भोजन की ओर रुख करने के बजाय इससे निपटने के लिए स्वस्थ तरीके ढूंढ़ना शुरू कर सकते हैं। ऐसे में आप उन ट्रिगर्स की पहचान करें और एक फूड डायरी मेंटेन करें। इससे आपको अपनी फूड हैबिट पर नजर खने में मदद मिल सकती है।
खाने से पहले रुकें
जब आपको कुछ कंफर्टेबल खाने का मन करे, तो एक पल रुकें। गहरी सांस लें और खुद से पूछें कि क्या आपको वाकई भूख लगी है या आप भावनाओं के कारण खा रहे हैं। कभी-कभी, बस खुद को थोड़ा सा आराम देने से आपको यह अहसास हो सकता है कि आपको भूख नहीं है।
कंफर्टेबल फूड के विकल्प ढूंढे
अगर आपको इमोशनल ईटिंग की आदत है तो ऐसे में अनहेल्दी स्नैक्स खाने की बजाय उसके कुछ हेल्दी विकल्पों पर स्विच करने का विचार करें। मसलन, अगर आपको कुछ कुरकुरा खाने की इच्छा हो रही है, तो ऐसे में आप गाजर की स्टिक या खीरा आज़माएं। यदि आप कुछ मीठा चाहते हैं, तो जामुन या सेब जैसे फल का सेवन करें।
रहें एक्टिव
परेशान होने पर आप इमोशनल ईटिंग करने की जगह फिजिकल एक्टिव रहने की कोशिश करें। फिजिकल एक्टिव रहने से आपको तनाव को दूर करने और भावनाओं को मैनेज करने का एक शानदार तरीका है। आप टहलने से लेकर योग करने या फिर डांसिंग तक का सहारा ले सकती हैं।
- मिताली जैन