Lord Vishnu Temple: Tirupati Balaji से Jagannath Puri तक, भगवान विष्णु के इन Divine मंदिरों की महिमा है अपरंपार

By अनन्या मिश्रा | Jan 05, 2026

भगवान विष्णु, भगवान शंकर और ब्रह्मदेव को त्रिदेव कहा जाता है। वहीं भगवान श्रीहरि विष्णु को जगत का पालनहार भी कहा जाता है। भारत में भगवान विष्णु को समर्पित कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। श्रीहरि विष्णु के इन प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करने मात्र से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको दक्षिण भारत में स्थित भगवान विष्णु के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन का सौभाग्य आपको जरूर प्राप्त करना चाहिए।

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मंदिर की कभी छाया नहीं दिखती और मंदिर की रसोई में सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर खाना पकाया जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सबसे ऊपर रखे बर्तन में सबसे पहले खाना पकता है।

तिरुपति बालाजी

भगवान विष्णु के प्रसिद्ध मंदिरों में तिरुपति बालाजी मंदिर भी शामिल है। यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित है। तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा श्रीवेंकटेश्वर स्वामी के रूप में की जाती है। इसलिए यह मंदिर श्री वेंकटेश्वर स्वामी के मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि कलियुग में भगवान श्रीहरि विष्णु इसी स्थान पर निवास करते हैं। माना जाता है कि श्री वेंकटेश्वर की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं, जोकि कभी नहीं उलझते हैं और हमेशा मुलायम बने रहते हैं।

पद्मनाभस्वामी मंदिर

पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान पद्मनाभस्वामी को समर्पित है। पद्मनाभस्वामी भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार माने गए हैं। पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित है। दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर में भगवान पद्मनाभस्वामी के दर्शन के लिए आते हैं। पद्मनाभस्वामी मंदिर को दुनिया का सबसे धनी मंदिर माना गया है।

गुरुवायुर मंदिर

बता दें कि केरल राज्य के त्रिशूर जिले में गुरुवायुर मंदिर स्थित है। इस मंदिर को दक्षिण की द्वारका के नाम से भी जाना जाता है। गुरुवायुर मंदिर से भक्तों की अटूट श्रद्धा जुड़ी हुई है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप गुरुवायुरप्पन को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर का निर्माण देवगुरु बृहस्पति के द्वारा किया गया था। गुरुवायुर मंदिर की खासियत है कि सूर्यदेव की किरणें सबसे पहले भगवान गुरुवायुर के चरणों पर गिरती है।

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