By अंकित सिंह | Jun 23, 2026
पश्चिम बंगाल की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह के बीच, पार्टी ने मंगलवार को फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास समेत 8 सीनियर नेताओं को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर निकाल दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह अनुशासनात्मक कार्रवाई नेतृत्व के बढ़ते संकट और गुटबाजी के कारण की गई है, क्योंकि कई नेता कथित तौर पर ऐसे काम कर रहे थे जो पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ थे।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस फ़ैसले का मकसद पार्टी में आंतरिक अनुशासन बहाल करना और नेतृत्व की पकड़ मज़बूत करना है। इसे हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व के सामने आई सबसे गंभीर आंतरिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के प्राधिकार को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब पार्टी के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।
यहां बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। इस नये ढांचे के जरिये बागी गुट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से प्रभावी रूप से हटा दिया है। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
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