By अंकित सिंह | May 06, 2026
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें विधायक टिकट के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के एक दिन बाद सामने आई है, जहां टीएमसी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई और भारतीय जनता पार्टी को राज्य में पहली बार सरकार बनाने का मौका मिला।
तिवारी ने कहा कि देखिए, इस हार से मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं हुई। ऐसा होना ही था जब पूरी पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास न हुआ हो। सिर्फ़ वही लोग टिकट खरीद सकते थे जो मोटी रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70-72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पाँच करोड़ रुपये दिए। मुझसे भी पूछा गया था, लेकिन मैंने देने से इनकार कर दिया। ज़रा देख लीजिए कि पैसे देने वालों में से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं।
तिवारी ने राजनीति में अपने प्रवेश के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले उनकी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी के अनुरोध पर उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सहमति दी। शिबपुर सीट जीतने के बाद उन्हें युवा एवं खेल मामलों का राज्य मंत्री नियुक्त किया गया।
तिवारी ने कहा कि उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में भी गंभीरता से खेल रहा था, तभी दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं। मैंने विनम्रता से मना कर दिया था, लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने फिर फोन किया और कहा, ‘मनोज, तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें बताएगा।’ मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मुझे लगा कि मैं एक सार्थक बदलाव ला सकता हूं। तिवारी ने दावा किया कि विधायक रहते हुए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए अपनी जेब से भी पैसे खर्च किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने उनके बार-बार ध्यान में लाने के बावजूद हावड़ा में जल निकासी और सीवेज व्यवस्था जैसी बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया। तिवारी ने बिल्डरों से जबरन वसूली करने के आरोपों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने क्रिकेट करियर से पर्याप्त कमाई कर ली है।