आज के समय में युवाओं के प्रति माता-पिता की समस्या का समाधान हिंदू संस्कृति नामक जड़ी-बूटी से ही हो सकता है: श्री मगनभाई पटेल

By प्रेस विज्ञप्ति | Apr 01, 2025

परम पूज्य द्वारकेश लालजी महादयाश्री का ५०वां स्वर्ण जयंती महोत्सव हाल ही में अहमदाबाद के बोपल क्षेत्र में सिंधु भवन रोड स्थित वृंदावन पार्टी प्लॉट में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से सनातन धर्म के करीब ४००० विचारक उपस्थित थे।

श्री मगनभाई पटेलने आगे बताया कि पूज्य जेजेश्रीने अहमदाबाद के ओगनज इलाके में इंटरनेशनल बोर्ड की "वल्लभाचार्य इंटरनेशनल गर्ल्स स्कुल " के निर्माण के लिए ३५ करोड़ से अधिक की राशि का संकल्प लिया है, जिसके लिए गुजरात सरकार के सहयोग एवं इस संस्था को प्राप्त दान से भूमि अधिग्रहण कर लिया गया है।

 इस अवसर पर परम पूज्य द्वारकेशलालजी महादयाश्री (जे.जे.श्री) ने अपनी दिव्यवाणी के माध्यम से उपस्थित सभी श्रोताओं को बताया कि इस ऐतिहासिक संकल्प में अनेक दानदाताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों के आर्थिक सहयोग से यह भगीरथ कार्य सम्पन्न होने जा रहा है तब आज हमारे बिच मगनबापा उपस्थित हैं जिन्हे समाज का भीष्म पितामह कहा जा सकता है क्योंकि कई सारी संस्थाओं का निर्माण उनके हाथों से हुआ है। भारत सरकार और गुजरात सरकार की विभिन्न समितियाँ,बोर्ड,निगम और सलाहकार समितियों में स्थान पाकर राष्ट्र निर्माण में महान कार्य करनेवाले एव आज भी अनेक संस्थाओं में जिनका विशेष योगदान है ऐसे श्री मगनभाई पटेल आज हमारे बीच मौजूद हैं उनके साथ अंकुरभाई पटेल भी उपस्थित है। इस कार्यक्रम में परम पूज्य द्वारकेशलालजी महादयाश्री एवं उनके पूज्य परिजनोंने पुष्टिमार्गीय ध्वज लहराया,जिसमें मगनभाई पटेल एवं अन्य लोग भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में बालक-बालिकाओंने सुंदर नृत्य के माध्यम से पुष्टिमार्ग के ५० वर्षों की झलक प्रस्तुत की।

परम पूज्य द्वारकेशलालजी महोदयश्री (जेजेश्री)ने आगे कहा कि यह संकल्प से सृजन तक की यात्रा है। मंदिर तो बहुत बने हैं, लेकिन अब विद्या का मंदिर बनाना है।जब हम लड़कियों की शिक्षा के बारे में सोचते हैं तो गुजरात जैसे राज्य में आंतरराष्ट्रीय कक्षाकी एक भी स्कूल या कॉलेज नहीं है,अहमदाबाद जैसा बड़ा शहर जिसकी आबादी करीब ८० लाख है,वहां आंतरराष्ट्रीय बोर्ड की कोई गर्ल्स स्कूल नहीं है, इसलिए हमने इन दो वर्षों में "वल्लभाचार्य इंटरनेशनल गर्ल्स स्कूल" बनाने का संकल्प लिया है।हमारी भावना इतनी ही है कि लड़किया उद्यमी बने,उनकी व्यावसायिक सोच विकसित हो, १२वीं कक्षा पास करने के बाद उन्हें एक छोटा सा ऋण दिया जाय ताकि वे एक छोटा सा स्टार्ट-अप शुरू कर सके वह छोटे से ऋण से व्यवसाय कर सके और आगे बढ़ सके और इसके लिए कई ऋणदाता और बैंक हमारे साथ जुड़ गए हैं।हमारा नारा है "करो और फिर बोलो,बनाओ और फिर लो".

 

मेरा ऐसा भाव था की जब अहमदाबाद में भूमि पूजन करूँगा तब ही अहमदाबाद के लोगों की सेवा को स्वीकार करू। कई वैष्णवों का आग्रह था की रजत तुला महोत्सव आयोजित कर के आपको चांदी से तौला जाए,तब मैंने कहा कि एक ही शर्त है कि जो भी आएगा, मैं गर्ल्स कॉलेज के निर्माण के लिए समर्पति कर दूंगा,मात्र एक ही घंटे में ८०० किलोग्राम चांदी एकत्र की गई और उसे लड़कियों के कॉलेज के निर्माण के लिए समर्पित कर दी गई। मेरा अनुभव रहा है कि समाज के कल्याण के लिए विचार होना चाहिए, संकल्प शुद्ध होना चाहिए,तो काम हमारा नहीं रहता,ठाकोरजी काम को अपना बना लेते हैं।मैंने अपनी आँखों से अनगिनत असंभव संकल्पों को संभव होते देखा है।अतःआज यहां उपस्थित इतने महानुभावों के समक्ष,मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि इस भगीरथ संकल्प में शामिल हों और विश्व कल्याण के इस कार्य में अपना योगदान दें। महाप्रभुजी के चरणों में मेरी यही प्रार्थना है।

इस अवसर पर जेजेश्री ने अपने दिव्य संदेश के माध्यम से कहा कि जीवन एक ही है, इसे जीवित रखने के लिए कोई मेहनत करता है तो बाकी सब सांस ले रहे हैं, सब अपना पेट भर रहे हैं, लेकिन जिस क्षण किसी को आपके माध्यम से जीवन की दिशा मिल जाती है, वह क्षण जीया हुआ माना जाता है। आज आप सभीने ५० वर्षों की झलक देखी, पुष्टिमार्ग की पताका फहराने के उद्देश्य से अगस्त २०२४ से प्रारंभ हुआ ये कार्य अभी सिर्फ ७ देशों में हुआ है, ४३ देश अभी बाकी हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व वल्लभ यानि भगवान श्री कृष्ण का परिवार बन चूका है।५० देशों की यह यात्रा केन्या, जहां विश्व का केंद्र है, यानि जहां से भूमध्य रेखा गुजरती है, वहा से शुरू हुई और आज ठाकोरजी की कृपा से अन्य देशों की ओर आगे बढ़ रही है। मैंने अपने जीवन का मार्ग वैष्णव धर्म के रूप में पाया है, इसलिए मुझे वैष्णव होने पर गर्व है। वैष्णव बनने के लिए आपको किसी के सम्मान की आवश्यकता नहीं है, इसीलिए इन ५० देशों में "Proud to be Vaishnav" अभियान चल रहा है और इसीलिए दुनिया में ऐसे देश हैं जहाँ हिंदू धर्म के आचार्य अभी तक नहीं पहुँच पाए हैं, चाहे वे अफ्रीकी देश हों, यूरोपीय देश हों, पूर्वी देश हों या पश्चिमी देश हों, लेकिन हर देश के अपने प्रोटोकॉल,वीजा प्रक्रिया आदि हैं, इसलिए यह कोई साधारण अभियान नहीं है।यह अभियान ७ देशों वाले संयुक्त अरब अमीरात में १ फरवरी २०२५ से भागवत सप्ताह के रूप में शुरू होगा और फिर न्यूजीलैंड,जापान,हांगकांग,वियतनाम,सिंगापुर, मलेशिया,यूरोप,दुबई,ब्रिटेन जैसे कई देशों में जारी रहेगा।इतिहास में पहली बार यह पृथ्वी परिक्रमा हो रही है।

आज भारतीय संस्कृति पूरे विश्व में फैल रही है। हमने हजारों घरों में वैष्णव धर्म की ज्योति देखी है।आज कोई भी वैष्णव घर ठाकोरजी के बिना नहीं है। यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।आज जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उससे हजारों लोगों को लाभ होता है। आज एक सफल डॉक्टर ने हजारों रोगियों को ठीक किया है। आज सफल व्यक्ति का सम्मान व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, यह महाप्रभुजी की विचारधारा का सम्मान है। लोगों को देश,काल और स्थान की बाधाओं का सामना करना पड़ता है,लेकिन विचारधारा को कोई सीमा नहीं बांध सकती। कई बार लोग कहते हैं कि आप सुनते नहीं, समझते नहीं,आप ऐसे बोलते हैं जो दूसरे व्यक्ति को पसंद नहीं आता,इसलिए ऐसे बोलिए जो दूसरे व्यक्ति को पसंद आए। क्योंकि थोर (एक प्रकार का कड़ा प्रसाद) को तोड़ना कठिन है, लेकिन हमारे लालन का शिरा सीधे गले में चला जाता है,इसलिए अब श्रीनाथजी के थोर की जगह शिरा का प्रसाद खिलाने की आवश्यकता है।

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि पूज्य वल्लभाचार्यजीने पुष्टिमार्ग के वैष्णव भक्ति संप्रदाय 'भक्ति कृपा मार्ग' की स्थापना की है। आचार्य श्री द्वारकेश लालजीने विश्व के सभी ५ महाद्वीपों में हवेलियों का निर्माण कर के "आंतरराष्ट्रीय वैष्णव संघ" की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहली हवेलियों में से एक केन्या के नैरोबी में स्थापित की गई,जिसे ‘श्री वल्लभधाम हवेली’ कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में जेजेश्री ने ‘श्री नाथद्वारा हवेली’ और उसके बाद अमेरिका के मैरीलैंड में ‘श्री नाथधाम हवेली’ और २०११ में ब्रिटेन के लीसेस्टर में ‘व्रजधाम हवेली’ की स्थापना की है। गुजरात के अहमदाबाद के बोपल क्षेत्र में भी जेजे श्री ने “भक्ति धाम हवेली” की स्थापना की है।

इसके साथ ही भारत के अन्य राज्यों में भी उनकी कृपा से अनेक हवेलियाँ स्थापित हुई हैं।

पूज्य जेजेश्री द्वारा अनेक सेवाकिय कार्य जैसे जरूरतमंदों को धन उपलब्ध कराना,बच्चों के लिए शिक्षा,निःशुल्क चिकित्सा शिविर,मोतियाबिंद सर्जरी के लिए दान,दैनिक भोजन कार्यक्रम,विभिन्न देशों में प्राकृतिक आपदाओं के लिए दान जैसे अनेक धर्मार्थ कार्य विश्व कल्याण के लिए अविरत चालू है।

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