By रेनू तिवारी | Jan 21, 2026
अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने वाली दो दिग्गज महिलाओं का रिश्ता किसी पेशेवर साथी से कहीं बढ़कर है। कल मंगलवार को दिल्ली प्रवास के दौरान, भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की। यह मिलन केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि यादों और साझा विरासतों का एक भावुक संगम था। सुनीता विलियम्स दिल्ली में कल्पना चावला की 90 वर्षीय माँ, संजोगता खरबंदा (संयोगिता) और उनकी बहन दीपा से मिलने पहुँचीं। जैसे ही सुनीता ने कल्पना की माँ को गले लगाया, कमरे में एक सन्नाटा सा छा गया और आँखें नम हो गईं।
दोनों ने एक-दूसरे का गले लगकर स्वागत किया जिसने पुरानी यादें ताजा कर दीं। भारत में जन्मीं अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चावला चालक दल के उन सात सदस्यों में से एक थीं, जिनकी फरवरी 2003 में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण मृत्यु हो गई थी।
दुर्घटना उस वक्त हुई थी जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान टूटकर नष्ट हो गया था। वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं और उनकी मृत्यु पर भारत में गहरा शोक व्यक्त किया गया। विलियम्स (60) ने मंगलवार को दिल्ली स्थित ‘अमेरिकन सेंटर’ में आयोजित ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ नामक एक संवाद सत्र में भाग लिया। लगभग एक घंटे के इस कार्यक्रम के समाप्त होते ही विलियम्स मंच से नीचे उतरीं और सभागार में पहली पंक्ति में बैठी चावला की मां संयोगिता चावला की ओर बढ़ीं तथा उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया। विलियम्स इस दौरान अपने चिरपरिचित अंतरिक्ष यात्री के लिबास में थीं। दोनों की मुलाकात ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया और विलियम्स ने जाने से पहले संपर्क में बने रहने की इच्छा व्यक्त की।
उन्होंने कल्पना चावला की बहन दीपा से भी मुलाकात की, जो इस कार्यक्रम में अपनी मां के साथ आई थीं। विलियम्स वर्तमान में भारत यात्रा पर हैं। वह 22 जनवरी से शुरू होने वाले केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के नौवें संस्करण में भाग लेने वाली हैं। आयोजकों ने दिसंबर के अंत में इसकी घोषणा की थी। अमेरिकी नौसेना की पूर्व कप्तान विलियम्स का जन्म 19 सितंबर, 1965 को अमेरिका के ओहायो के यूक्लिड में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजराती थे और मेहसाणा जिले के झुलासन के रहने वाले थे जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई थीं। अपने प्रारंभिक संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि भारत आने पर घर वापसी जैसा महसूस हो रहा है, क्योंकि यह वह देश है जहां उनके पिता का जन्म हुआ था।
बाद में चावला की मां ने कार्यक्रम के दौरान ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘वह (विलियम्स) परिवार के सदस्य की तरह हैं।’’ चावला की मां ने कहा कि कोलंबिया हादसे के बाद ‘‘वह तीन महीने तक हमारे घर आती रहीं’’, नियमित रूप से सुबह से रात तक रुकती थीं और ‘‘शोक में डूबे हमारे परिवार’’ को सांत्वना देती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि विलियम्स और चावला अंतरिक्ष यात्री के तौर पर एक-दूसरे को अपने साझा पेशे में और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया करती थीं।’’
अपनी बेटी के जीवन को याद करते हुए चावला ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वह अपने साथ अनमोल खजाना लेकर आई थी। उसने हमें बहुत कुछ सिखाया। हम क्या कह सकते हैं?’’ संयोगिता चावला ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को उसके सपनों को पूरा करने में पूरा समर्थन दिया। उन्होंने कहा, ‘‘वह (कल्पना) अक्सर कहा करती थी, ‘मानवता ही एकमात्र धर्म है’ और उसने कभी कोई दूसरा नाम नहीं लिया। जब हम उससे पूछते थे, तुम्हारा धर्म क्या है? तो वह कहती थी, ‘मेरा धर्म कर्म है’।
पीटीआई-भाषा