By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 04, 2026
अगरतला, चार सितंबर त्रिपुरा में हथियार डाल चुके तीन उग्रवादी संगठनों की छह सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार से शुरू हुई 72 घंटे की राज्यव्यापी हड़ताल के कारण सड़क और रेल यातायात बाधित हुआ। इन मांगों में उस त्रिपक्षीय समझौते को लागू करने की मांग भी शामिल है जिसके तहत इन संगठनों ने हथियार डाले थे। उग्रवादी संगठनों - नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) (ओरिजिनल), एनएलएफटी (पीडी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ)- ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ 2024 में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हथियार डाल दिए थे।
अतिरिक्त बलों को एहतियातन तैनात किया गया है।’’ यह नाकेबंदी ऐसे समय की गई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा के बीच शुक्रवार को नयी दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है। टिपरा मोथा के महासचिव बृषकेतु देबबर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यह बैठक 2024 में हुए त्रिपक्षीय समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। उन्होंने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा, ‘‘समझौते में मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का जो वादा किया गया था, उसके बारे में जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, हम तब तक ग्राम समिति चुनावों के लिए किसी तरह का गठबंधन नहीं करेंगे।’’ हथियार डाल चुके इन तीनों उग्रवादी संगठनों ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के उचित पुनर्वास की मांग को लेकर 12 जून 2026 को रेल और राष्ट्रीय राजमार्ग की नाकेबंदी शुरू की थी लेकिन राज्य सरकार द्वारा उनकी चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन दिये जाने के बाद आंदोलन वापस ले लिया था।