By अंकित सिंह | Sep 02, 2022
हिमाचल प्रदेश में इस साल विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस लगातार मेहनत भी कर रही है। हिमाचल प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को हराकर सत्ता में वापसी की थी। हिमाचल प्रदेश के चुनावी इतिहास को देखें तो यहां 5 साल कांग्रेस और 5 साल भाजपा की सरकार पिछले कई सालों से बनती रही है। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की एंट्री से यहां के चुनाव दिलचस्प होते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के लिए फिलहाल सब कुछ सामान्य नहीं है। हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतने की कोशिश में जुटी कांग्रेस के लिए कई सीटों पर मजबूत उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस की मुश्किलें आगामी चुनाव को लेकर हिमाचल प्रदेश में बढ़ सकती हैं।
सूत्रों के मुताबिक के कांग्रेस के 20 विधायक 2017 के चुनाव में जीत हासिल की थी। उन्हें एक बार फिर से टिकट दिया जा सकता है। इसके अलावा पूर्व मंत्रियों और दिग्गज नेताओं को भी चुनावी रण में उतारने की तैयारी है। माना जा रहा है कि 35 बड़े नेताओं को दोबारा प्रत्याशी बनाया जाएगा। लेकिन उन सीटों पर कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार नहीं मिल पा रहा है जहां भाजपा का लंबे समय से दबदबा रहा है। धर्मपुर, कसौली, नाचन भोरंज, शाहपुर ऐसे ही विधानसभा सीट है जहां कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार ढूंढने पढ़ रहे हैं। कांग्रेस चुनाव में 40 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी ताकि उसकी सरकार बने। वहीं भाजपा भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगी। आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा की सीटें हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, कांग्रेस के खाते में 20 सीट और एक सीट cpi-m के खाते में गई थी।