Prabhasakshi NewsRoom: इधर Trump बोले, ''दुनिया तुसमे नफरत कर रही है'', उधर इजराइली बोले, ''अमेरिका के आगे झुको मत'', दोनों तरफ से घिर गये Netanyahu

By नीरज कुमार दुबे | Jun 02, 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लेबनान को लेकर हुई तीखी बातचीत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू को लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ी फटकार लगाई। रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रंप खास तौर पर बेरुत पर संभावित हमले और सैन्य अभियान के विस्तार की योजना से बेहद नाराज थे।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप ने लेबनान में आम नागरिकों की मौतों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि सीमित लक्ष्यों के लिए भारी तबाही मचाना उचित नहीं है। हालांकि ट्रंप ने यह माना कि हिजबुल्लाह के हमलों के जवाब में इजराइल को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाई जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ चुकी है।

इसी बीच, ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि उनकी नेतन्याहू के साथ बहुत उपयोगी बातचीत हुई है और इसके बाद बेरुत की ओर जाने वाली इजराइली सेना को वापस मोड़ दिया गया है। ट्रंप ने लिखा कि बेरुत पर कोई हमला नहीं होगा और जो सैनिक वहां जाने वाले थे उन्हें रोक दिया गया है। उन्होंने नेतन्याहू को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह एक बड़ा सैन्य अभियान बनने जा रहा था जिसे रोक लिया गया।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी बातचीत हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों से भी हुई है और दोनों पक्ष गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इजराइल हमला नहीं करेगा और हिजबुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई से बचेगा। हालांकि ट्रंप के इस दावे के कुछ ही घंटे बाद नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में जारी बयान में स्पष्ट किया कि यदि हिजबुल्लाह इजराइली शहरों और नागरिकों पर हमले बंद नहीं करता तो इजराइल बेरुत में आतंकी ठिकानों पर हमला करेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान पहले की तरह जारी रहेगा और उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

उधर, इजराइल के भीतर भी नेतन्याहू के फैसले को लेकर मतभेद सामने आए हैं। कई इजराइली अधिकारियों ने ट्रंप के दबाव में लेबनान पर प्रस्तावित हमले को रोकने के निर्णय की आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे इजराइल की सैन्य रणनीति और सुरक्षा नीति पर असर पड़ सकता है। इजराइल में राजनीतिक स्तर पर भी नेतन्याहू की मुश्किलें लगातार बढती दिखाई दे रही हैं। एक ओर अमेरिका समेत दुनिया के कई देश लेबनान में इजराइली कार्रवाई को लेकर खुलकर असहमति जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इजराइल के भीतर भी उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। लगातार युद्ध, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों ने उनकी छवि को प्रभावित किया है। इजराइल के कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में नेतन्याहू की जीत की संभावना पहले की तुलना में काफी कमजोर हो सकती है। विपक्षी दल सरकार की नीतियों को असफल बता रहे हैं और आम लोगों के बीच भी युद्ध को लेकर थकान तथा असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे हालात में नेतन्याहू के सामने कूटनीतिक दबाव, घरेलू राजनीतिक संकट और सुरक्षा चुनौतियों का एक साथ पहाड़ खडा हो गया है।

दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान ने भी कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि यदि लेबनान पर हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए तो इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ताओं पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खबरों के अनुसार ईरान ने संकेत दिया है कि लेबनान में इजराइल की कार्रवाई जारी रहने पर वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत से पीछे हट सकता है। ट्रंप ने हालांकि भरोसा जताया कि वार्ताएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं और अगले सप्ताह तक युद्धविराम तथा होरमुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बहाल करने को लेकर समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ बिंदुओं पर अंतिम सहमति बननी बाकी है।

उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई यह बातचीत हाल के महीनों की सबसे तनावपूर्ण वार्ताओं में से एक रही। वैसे तो दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार ट्रंप की ओर से नेतन्याहू के लिए कथित रूप से गाली गलौच की भाषा के इस्तेमाल ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। फिलहाल लेबनान, इजराइल और ईरान से जुड़े हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और पूरी दुनिया की नजर इस संकट के खात्मे पर टिकी हुई है।

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