मोदी हो गए तैयार! रूस से तेल खरीद पर ट्रंप के दावे ने सबको चौंकाया

By अभिनय आकाश | Feb 03, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा, इसके बदले में नई दिल्ली रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा करेगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात को वेनेजुएला और संयुक्त राज्य अमेरिका से आयात करने पर सहमत हो गए हैं। वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।

टैरिफ घटाया

2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने कई भारतीय सामानों पर 26% रेसिप्रोकल टेरिफ लगाए। इसके बाद 10 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने इन टेरिफ को 90 दिनों के लिए रोक दिया। अमेरिकी आयातों पर 10% शुल्क बरकरार रखा और 31 जुलाई 2025 को ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 25% टेरिफ का ऐलान किया और इसके बाद 7 अगस्त 2025 को ट्रंप ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% का टेरिफ लगा दिया। तो भारत पर लगातार ट्रंप की तरफ से यह टेरिफ लगाया जाता रहा। हालांकि भारत इस दरमियान काफी संयम दिखाता है। भारत के प्रधानमंत्री इन तमाम मसलों पर चुप रहते हैं। उनकी चुप्पी ट्रंप को करारा जवाब की तरह थी। आखिरकार तमाम धमकियों, तमाम चेताविनियों और बयानबाजी के बीच 2 फरवरी 2026 जी हां, यह वो ऐतिहासिक तारीख हो गई जब भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील पर साइन कर लिया है। इसके बाद ट्रंप ने भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% टेरिफ को तत्काल प्रभाव से घटा दिया है और 18% इसे कर दिया है। ट्रंप ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी 30 मिनट की बातचीत के बाद यह फैसला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए बड़ी जीत बताया है। 

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अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद

हालांकि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और इसके बदले में अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति जताई है। भारत ने अगले कुछ साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने की प्रतिबद्धता भी दिखाई है। आपको बता दें कि दोनों देशों ने कहीं ना कहीं थोड़ा सा नरमी दिखाई है और इसके बाद जाकर ही इस डील पर सहमति बन बन पाई है। अब देखना दिलचस्प होगा क्योंकि भारत ने अभी हाल ही में ईयू के साथ ट्रेड डील किया था और इसके बाद ईयू एक बड़े मार्केट के तौर पर भारत के लिए उपलब्ध हो गया। 

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