By अभिनय आकाश | Jan 09, 2026
पेरिस में भारत ने बिना शोर मचाए अमेरिका तक को बेचैन कर देने वाला संदेश दे डाला है जब पूरी पूरी दुनिया अमेरिका के अगले कदम को लेकर सहमी हुई है। जब डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद धमकियां, दबाव और दादागिरी या फिर यह कह लें गुंडागर्दी फिर से लौट आई है। ठीक उसी वक्त भारत ने एक ऐसी शांत लेकिन निर्णायक चाल चली है जिससे वाशिंगटन के गलियारों में पसीना छूटना तय है। दरअसल भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंच चुके हैं और उन्होंने वहां साफ शब्दों में कहा कि फ्रांस हमारे सबसे पुराने रणनीतिक साझदारों में से एक है और यूरोप में हमारा पहला रणनीतिक साझेदार है। अब इसे सामान्य बयान मत समझिए। यह एक भू- राजनीतिक संदेश है। मतलब साफ है भारत अब यूरोप में अमेरिका के इशारों से नहीं अपनी शर्तों पर रिश्ते निभा रहा।
ट्रंप के आते ही नाटो को धमकी, यूरोप पर दबाव, व्यापार युद्ध की चेतावनी और जो मेरे साथ नहीं वो मेरे खिलाफ वाली नीति। पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल और ठीक इसी माहौल पर जयशंकर ने पेरिस से चोट की। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यूरोप गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जिनके वैश्विक सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव होंगे। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में उत्पन्न हो रही स्थिति सहित हाल के संकटों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक अनिश्चितता का मतलब यह है कि भारत और फ्रांस जैसे देशों की स्थिरता बनाए रखने में मदद करने की जिम्मेदारी है।
फ्रांस की धरती पर खड़े होकर मंत्री ने कहा कि यूरोप, जिसे अक्सर मानवाधिकार और कूटनीति का शिक्षक माना जाता है, अब अपने देश में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोप बहुत कठिन दौर से गुजर रहा है जिसका असर वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने विश्व व्यवस्था के निर्धारण के लिए व्यापक वैश्विक चर्चा का भी आह्वान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे निकायों में पश्चिमी वर्चस्व की परोक्ष रूप से आलोचना करता है और सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। राजनयिक विश्लेषक जयशंकर की टिप्पणियों को यूरोप की वर्तमान सुरक्षा और आर्थिक कमजोरियों के संकेत के रूप में देखते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच, यूरोप अपनी सुरक्षा और रणनीतिक दिशाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
यानी भारत अब फैसले अपने हित पर लेता है। भारत स्थिति को लीड करता है। अब जरा ध्यान दीजिए जो बयान जयशंकर ने दिया। जयशंकर ने एक साथ तीन मंच गिनाए। ब्रिक्स, की अध्यक्षता भारत के पास G7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास। G20 में दोनों देश अहम भूमिका में। यह बहुत बड़ा संकेत है क्योंकि ब्रिक्स अमेरिका के लिए चुनौती है। G7 अमेरिका का पुराना क्लब है और इन दोनों के बीच भारत और फ्रांस का सीधा तालमेल। यही वजह है कि अब अमेरिका को लगने लगा है कि खेल हाथ से निकलने वाला है। जयशंकर ने सबसे खतरनाक शब्द बोला। दो ऐसे राष्ट्र जो बहुध्रविता के लिए प्रतिबद्ध है। यही वो शब्द है जिससे अमेरिका खासकर ट्रंप डरता है। ट्रंप की मनमानी के बाद भारत-फ्रांस की बैठक अमेरिका के लिए रेड लाइन है या यूं कह ले रेड अलर्ट है।