By अभिनय आकाश | Jan 27, 2026
दुनिया में जितने भी देश हैं वो आपस में जिस भी तरीके से कनेक्टेड हैं उनका मेन फोकस होता है कि उनका व्यापार कैसे चले। उनकी जो ट्रेड डील है वो आपस में कैसे मुकम्मल हो। किन्हीं दो देशों में ट्रेड डील पर सहमति हो जाती है तो अच्छा बिजनेस चल जाता है। किनहीं दो देशों में अगर जंग छिड़ जाए तो सबसे पहला असर बिजनेस पर ही होता है। आज हम बात करेंगे एक उस टर्म की जो पिछले काफी वक्त से चर्चा में है। हालांकि ये टर्म कोई नया नहीं है। पिछले कई सालों से जो बिजनेस में लोग इन्वॉल्व रहते हैं उन्होंने ये टर्म सुना होगा। वो है मदर ऑफ ऑल डील्स। यानी कि सबसे बड़ी डील भारत ने किया है, इसकी चर्चा उस वक्त और ज्यादा होने लगी जब यूरोपीय संघ के अध्यक्ष भारत आई और फिर जिस तरीके से मुलाकातों का दौर चला। कहा जा रहा है कि जो पावर लेडी है ये कुछ ऐसा सोच कर आई है जिससे भारत को भी बहुत फायदा होने वाला है और जिस ट्रेड डील पर अमेरिका इतरा रहा था वो बहुत पीछे छूटती हुई चली जाएगी।
सिर्फ दो यूनिट ऐसे हैं जिनसे भारत का जो व्यापार है वह फायदे में है। एक अमेरिका जो ये ट्रेड बैलेंस है वो भारत के पक्ष में झुका झुका हुआ था। अमेरिका से हम फायदा उठाते थे। मतलब हमें ज्यादा फायदा था। और दूसरी यूनिट थी यूरोपीय यूनियन। हमारा जो ट्रेड है ट्रेड बैलेंस की बात करें तो वो भारत की तरफ झुका हुआ है यूरोपीय यूनियन से भी। अमेरिका ने जब टेरिफ लगाया तो हमें तीन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा नुकसान हुए। एक टेक्सटाइल, दूसरा फार्मा और तीसरा लेबर जो कि हमारे यहां के लोग जाते थे और ट्रंप ने कह दिया कि नहीं वीजा का नियम खड़ा कर देंगे ये करेंगे। सिर्फ इन तीन सेक्टर्स के लोग बहुत परेशान थे। हमारी दवाएं, हमारे कनिकल जो ये इंस्ट्रूमेंट जो हम बनाते हैं अमेरिका जाता था यह और वहां कम बेहद कम पैसे पर इंडियन दवाएं वहां मिलती थी। अब टेरिफ लगा दिया अमेरिका में वह दवाएं महंगी हो गई और यहां से डिमांड कम होने लगी तो मोदी जी ने कहा कि यूरोप अपना टेरिफ कम कर दे भारतीय दवाओं पे वो भी राजी हो गए। अमेरिका ने वीजा इतना टफ कर दिया है रूस तो हम कैसे जाएंगे? तो उसका उपाय यह है कि अमेरिका मत जाओ, यूरोप जाओ और यूरोप के सारे देश सारे देश जितना यूरोपीय यूनियन में शामिल हैं सभी भारतीय स्किल्ड लेबर्स का यहां के इंजीनियर्स डॉक्टर जो भी नौकरी करने जाना चाहते हैं विदेश उनके लिए अपने नियम को आसान बनाएंगे। इस बात को लेके भी सहमति हो गई है।
यूरोपियन यूनियन से जो केमिकल्स आते हैं जो कि पेंट इंडस्ट्री और फर्टिलाइजर इंडस्ट्री वगैरह में यूज़ होते हैं। उन केमिकल्स पे एलिमिनेट मतलब पूरी तरह सारे टेरिफ्स खत्म करने की बात की जा रही है। दूसरा है ऑप्टिकल मेडिकल और सर्जिकल इक्विपमेंट। उन प्रोडक्ट्स में से 90% प्रोडक्ट्स पे कहा जा रहा है कि टेरिफ एलिमिनेट हो जाएंगे। उसके बाद बात करेंगे एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट की। उसमें भी ऑलमोस्ट सभी प्रोडक्ट्स पर टेरिफ एलिमिनेट हो जाएगा। उसके बाद अल्कोहल में स्पिरिट्स में काफी सारे डिफरेंसेस की बात हो रही है कि जो बियर है उस पर टेरिफ 50% तक आने की बात हो रही है। स्पिरिट्स पे 40% तक और वाइन पे भी 20 से 30% तक।
2007 में जब ये डील शुरू हुई थी और जब 2013 में बीच में सस्पेंड की गई थी उस वक्त बातें यही चल रही थी कि ऑटोमेकर्स जो कार बनाने वाली कंपनीज़ हैं भारत और यूक में उनके बीच समझौता नहीं बैठ पा रहा था। अब बोला जा रहा है कि एक ईयरली कोटा होगा। कह रहे हैं कि शायद 2500 व्हीकल्स पर ईयर उसका एक कोटा होगा। आपको बता दें कि लग्जरी कार्स पे इस वक्त 110% के करीब टेरिफ लग रहा है। इस डील के बाद भारत में यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।
भारत की आबादी 140 करोड़ के आसपास है और फिर 40 करोड़ 27 28 करोड़ पूरा ये यूरोपीय यूनियन मिलाकर हो जाता है तो पूरे विश्व की लगभग 20 से 25% आबादी इससे डायरेक्टली प्रभावित होगी वन क्वार्टर इन्होंने कहा है उसेला ने कि वन क्वार्टर ऑफ आबादी डायरेक्ट प्रभावित हो रही है। दूसरी बात कि पूरी दुनिया की 25% जीडीपी भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर बनाते हैं। 25% तो ये डील होने के बाद 25% पूरा दुनिया का अर्थव्यवस्था प्रभावित होने वाली है। ये दोनों हो गया। ट्रंप के टेरिफ्स अभी लागू हो चुके हैं। उनका फर्क हम पे अभी पड़ रहा है। ईयू के साथ जो डील हुई है वो डील कब इंप्लीमेंट होगी? उसके बाद जाके हम सोच सकते हैं कि ट्रंप के टेररिफ्स का एक तोड़ मिल गया है। तो जब तक वह डील इंप्लीमेंट नहीं होगी हमें नहीं पता कि ट्रंप के टेररिफ्स का ये रिप्लाई होगा या नहीं होगा। पर हां इससे एक चीज जरूर है सिंबॉलिज्म कि जब ट्रंप ये चीज देख रहे हैं आपने देखा होगा कि ट्रंप के एडमिनिस्ट्रेशन में भी लोगों ने कल जब उनको पता चला कि ईओ और इंडिया की ट्रेड डील ऑलमोस्ट कंप्लीट हो गई है। उन्होंने थोड़ी नाराजगी जताई है इस बात को लेकर।