110 से सीधे 40% होगा टैरिफ, यूरोप से आने वाले इस सामान पर होगी 'महाबचत'

Tariff
प्रतिरूप फोटो
ANI
अभिनय आकाश । Jan 26 2026 1:25PM

दो सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 27 देशों के इस समूह से आयातित 15,000 यूरो (17,739 डॉलर) से अधिक की सीमित संख्या में कारों पर कर को तत्काल कम करने पर सहमति जताई है। उन्होंने आगे बताया कि समय के साथ इसे और घटाकर 10% कर दिया जाएगा, जिससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान हो जाएगा। सूत्रों ने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया क्योंकि वार्ता गोपनीय है और इसमें अंतिम समय में बदलाव हो सकते हैं।

भारत यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर टैरिफ को 110% से घटाकर 40% करने की योजना बना रहा है। यह देश के विशाल बाजार के लिए अब तक का सबसे बड़ा द्वार खोलने का प्रयास है, क्योंकि दोनों पक्ष एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जो मंगलवार तक लागू हो सकता है। रायटर्स को वार्ता से अवगत दो सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 27 देशों के इस समूह से आयातित 15,000 यूरो (17,739 डॉलर) से अधिक की सीमित संख्या में कारों पर कर को तत्काल कम करने पर सहमति जताई है। उन्होंने आगे बताया कि समय के साथ इसे और घटाकर 10% कर दिया जाएगा, जिससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान हो जाएगा। सूत्रों ने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया क्योंकि वार्ता गोपनीय है और इसमें अंतिम समय में बदलाव हो सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: व्यापार से रक्षा तक, India-EU की नई 'पार्टनरशिप' पर इस महिला ने ऐसा क्या कहा? चीन-रूस-America पर निर्भरता होगी कम

भारत और यूरोपीय संघ द्वारा मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते के लिए चल रही लंबी वार्ता के समापन की घोषणा किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद दोनों पक्ष इसके विवरण को अंतिम रूप देंगे और इसे "अब तक के सबसे महत्वपूर्ण समझौते" के रूप में वर्णित किया जा रहा है। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ा सकता है और वस्त्र और आभूषण जैसे भारतीय सामानों के निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, जो अगस्त के अंत से अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन इसका घरेलू ऑटो उद्योग सबसे अधिक संरक्षित उद्योगों में से एक रहा है। नई दिल्ली वर्तमान में आयातित कारों पर 70% और 110% का टैरिफ लगाती है, जिसकी टेस्ला प्रमुख एलोन मस्क सहित कई अधिकारियों द्वारा अक्सर आलोचना की जाती है। एक सूत्र के अनुसार, नई दिल्ली ने प्रति वर्ष लगभग 200,000 दहन इंजन वाली कारों पर आयात शुल्क को तुरंत घटाकर 40% करने का प्रस्ताव दिया है, जो इस क्षेत्र को खोलने की दिशा में अब तक का सबसे आक्रामक कदम है। सूत्र ने आगे कहा कि इस कोटा में अंतिम समय में बदलाव हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: 77वां Republic Day: European Union को न्योता, जानें भारत की इस कूटनीति के गहरे मायने

भारत ईयू समझौते के तहत दोनों पक्ष आपसी व्यापार वाली 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क को कम या समाप्त करेंगे। कपड़ा और फुटवियर जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों पर शुल्क पहले ही दिन से समाप्त हो सकता है, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं पर इसे पांच से दस वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क ने वैश्विक व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है। भारत वर्तमान में वहां 50 प्रतिशत तक के उच्च शुल्क का सामना कर रहा है। माना जा रहा है कि यह एफटीए भारतीय निर्यातकों को अपने बाजार विविधीकरण और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। भारत इस समझौते के जरिए अपने कपड़ा, चमड़ा और हथकरघा जैसे क्षेत्रों के लिए शुन्य-शुल्कबाजार पहुंच की तलाश में है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ अपने ऑटोमोबाइल निर्यात, वाइन और हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्रों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है। संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को फिलहाल इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था।

इसे भी पढ़ें: भारतीय किसानों के लिए US से बेहतर क्यों है EU की Mother of All Deals? समझिए इस मेगा ट्रेड एग्रीमेंट का पूरा गणित

यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 117.4 अरब डॉलर रहा है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रविवार को कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता घरेलू उद्योगों के लिए खतरा बनने के बजाय लागत कम करने और व्यापार विस्तार में सहायक होगा। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं, क्योंकि दोनों मूल्य श्रृंखला के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं। श्रीवास्तव ने कहा, भारत श्रम-प्रधान और प्रसंस्करण आधारित वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि यूरोपीय संघ पूंजीगत वस्तुओं, उन्नत प्रौद्योगिकी और औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति करता है। यह पूरकता बताती है कि एफटीए से उत्पादन लागत कम होगी और दोनों पक्षों को लाभ होगा।

All the updates here:

अन्य न्यूज़