ट्रंप का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान, USSR के अतीत के पन्नों को जोड़ते पुतिन, खुद को अखंड बनाने की कोशिश में लगी दुनिया के बीच भारत कहां खड़ा

By अभिनय आकाश | Jan 09, 2025

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मनुष्य का जीवन अनेकोनेक इच्छाओं और लालसाओ से भरा होता है, एक के बाद एक इच्छाएं जन्म लेती रहती है। इच्छा का प्रतिबिंब भावना है। प्रबल इच्छा भावना बन कर बहती है और मनुष्य इच्छा के कारण कर्म की दिशा में कदम रख देता है, इच्छा के कारण ही मनुष्य क्रियाशील होता है । जैसी इच्छाएं होती है भावनाएं भी प्रबल और बलवान होती चली जाती है। इन्हीं इच्छाओं को लिए विश्वभर के दिग्गज नेता इतिहास को वापस लाने, इतिहास को पहले जैसा बनाने या फिर नया इतिहास लिखने की कोशिश में लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का ग्रेटर अमेरिका प्लान हो या व्लादिमीर पुतिन का सोवियत संघ को फिर से जोड़ने की कोशिश। वहीं विकासशील देश भारत में भी समय समय पर अखंड भारत की मांग जोर पकड़ती रही है। ऐसे में आज आपको अमेरिका से लेकर रूस तक के विस्तार की कहानी बताएंगे और साथ ही जानेंगे कि अगर पश्चिमी देश इस तर्ज पर अपने गौरवशाली अतीत को वापस लाने की होड़ में लगे हैं तो भारत भी अपना अखंड भारत वाला सपना क्यों नहीं पूरा कर सकता है? 

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कनाडा पर कब्जा कर लेंगे ट्रंप?

20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का नारा लगाया। लेकिन अब वो ग्रेट अमेरिका और ग्रेटर अमेरिका का ख्वाब देख रहे हैं। जिसमें कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना शामिल है। जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने एक बार फिर से अमेरिका को ग्रेटर अमेरिका बनाने का मिशन दोहरा दिया। इस बार ट्रंप ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि कनाडा में मौजूद कई लोग अपने देश को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में देखना चाहते हैं। अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो कोई टैरिफ नहीं देना होगा। टैक्स बहुत कम हो जाएंगे और देश के नागरिक रूस और चीन के जहाजों के खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। यानी ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया है। 

आखिर क्या है ट्रंप का ग्रेटर अमेरिका का प्लान

क्रिसमस से ठीक पहले ट्रंप के बेटे एरिक ने एक तस्वीर पोस्ट की थी। एक शॉपिंग कार्ट को डोनाल्ड ट्रंप अपने मोबाइल पर देख रहे हैं। इसमें सबसे ऊपर कनाडा नजर आया, बीच में ग्रीनलैंड और उसके नीचे पनामा कनाल नजर आ रहा था। ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं। वो ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना चाहते हैं। इसके साथ ही वो पनामा नहर पर कब्जा करना चाहता है। 

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अखंड रूस बनाने की जिद में हैं पुतिन

साल 2018 की बात है एक पत्रकार ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से पूछा कि आप अपने देश के इतिहास में किस घटनाक्रम को पलटना चाहोगे। पुतिन ने एक लाइन में बोला- द कोलैप्स ऑफ द सोवियत यूनियन। कई मौके ऐसे आए जब पुतिन ने साफगोई से कहा कि अगर वो ऐसा कर सकते तो यूएसएसआर के विघटन की कहानी को उलट कर रख देते। कुछ ऐसा ही रूसी राष्ट्रपति करते भी नजर आ रहे हैं। इतिहास को पलटने, पुराना इतिहास वापस लाने या फिर कहे कि एक नया ही इतिहास लिखने की कोशिश में रूसी राष्ट्पति नजर आ रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बिना एक भी गोली चलाए यूक्रेन को तीन हिस्सों में बांट दिया। 2008 में जॉर्जिया, 2014 में क्रीमिया, 8 साल बाद यूक्रेन पर चढ़ाई कर दी और तीन सालों से जंग जारी है। 

क्या था सोवियत संघ और कैसा था उसका रूतबा?

सोवियत संघ के बनने और बिखड़ने की 70 साल की इस कहानी में ऐसे कई मुकाम आए थे जब दुनिया इसकी ताकत के सामने हिल गई थी।  साल 1917 में जब यूरोप और एशिया दोनों महाद्वीपों में फैले देश रूस के शासक जार के कुशासन के खिलाफ लेनिन ने बोल्सेविक क्रांति का बिगुल बजाया था। लेनिन मार्क्सवाद से प्रेरित थे और इसी के आधार पर उन्होंने रूसी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की और जार की सत्ता को उखाड़ फेंका और सोवियत संघ की स्थापना की। इस संघ में रूस की सीमा से लगे एशिया और यूरोप के कई इलाके शामिल थे। जिन्हें आज दुनिया बेलारूस, आर्मीनिया, अजरबैजान, इस्टोनिया, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, कीर्गिस्तान, लातविया, लिथुआनिया, मालदोवा, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन और उज़्बेकिस्तान जैसे देशों के नाम से जानती है। 

भारत का गौरवशाली इतिहास

पहले के समय में भारत 16 जनपदों में बंटा हुआ था। आज तो ये सभी जानते हैं कि बांग्लादेश और पाकिस्तान तो भारत से ही अलग हुए हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इनको मिलाकर करीब 20 से भी ज्यादा देश भारत से अलग हो चुके हैं। 25 सौ साल पहले भारत अखंड हुआ करता था। लेकिन अरब, तुर्क, शक्य, फूल, कुशल, डच, पुर्तगाली, फ्रांसीसि और अंग्रेजों ने मिलकर भारत के कई टुकड़े कर दिए। 

क्या है अखंड भारत का मतलब

अखंड भारत का अर्थ है अविभाजित भारत जिसका भौगोलिक विस्तार प्राचीन काल में बहुत विस्तृत था और इसमें वर्तमान अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, थाइलैंड शामिल थे। अखंड भारत का विचार सनातन भारतीय सभ्यता जितना ही पुराना है क्योंकि इसे प्राचीन भारतीय शास्त्रों में विधिवत स्थान मिला।  तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व, वर्तमान के अफगानिस्तान, पाकिस्तान, आधुनिक भारत, नेपाल, बर्मा, तिब्बत, भूटान और बांग्लादेश के आधुनिक राष्ट्रों को भारतीय उपमहाद्वीप कवर करता था। बाद में कई स्वतंत्र राज्यों में विभाजित किया गया था। ऋषियों के आश्रम में पले और युगपुरुषों की उंगली थाम कर चले वाले अखंड भारत की कहानी अपने आप में बहुत ही दिलचस्प रही है। इतिहास का पहला पन्ना तब लिखा गया था जब मनुष्यों ने दिन को समय और तारीखों में बांटना नहीं सीखा था। आज मानचित्र में जैसी छवि है भारत हमेशा से ऐसा नहीं था। अनेकों टुकड़ों में कटा हुआ था। जनपदों, महाजनपदों में बंटा हुआ था। फिर एक जिन तक्षशिला में जन्में एक प्रतापी राजा ने अपनी सिखा खोल दी और यहीं से भारत के अखंड राष्ट्र बनने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया। खंड खंड बिखड़े हुए भाग एक ध्वजा में सिमट आए। आज के प्रसंग में कहूं तो चाणक्य और चंद्रगुप्त ने बिहार से बलूचिस्तान और कश्मीर से कंधार तक भारत की सीमाओं को फैला दिया। सम्राट अशोक ने तो इन सीमओं को तक्षशिला से इरान तक खींच दी। भौगोलिक और अध्यात्मिक दोनों रूपों में ये विस्तार पूरे विश्व को अंचभित कर रहा था। एक तरफ तो तलवारों की आवाजें आ रही थी, दूसरी तरफ महावीर और बुद्ध की वाणी सभी को लुभा रही थी।  

क्या अखंड भारत संभव

दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। हालांकि ये बेहद मुश्किल जरूर है। सभी देश आज आजाद हैं और उनका अपना संविधान है। अपनी राजनीतिक व्यवस्था है। इन्हें वापस जोड़ने के दो रास्ते हैं। पहला ये कि जंग करके भारत इन पर कब्जा कर ले। जिसकी फिलहाल कोई संभावना नहीं है। दूसरा ये कि ये देश खुद ही अपनी मर्जी से अखंड भारत में शामिल हो जाए। लेकिन इसके अलावा तीसरा विकल्प ये भी है कि ईयू कि तर्ज पर ऐसा गठबंधन बने। एक यूनियन हो और उसका एक पार्लियामेंट हो जहां सभी देश मिलकर बिल पास करे और उस पर एक्शन ले। अभी हमारे पास क्यू ऑपरेशन के नाम पर केवल शार्क समिट है। लेकिन ये बात सभी जानते हैं कि हर साल इसका महत्व और घटता ही जा रहा है। अखंड भारत के प्लान में एक बड़ा फायदा अर्थव्यवस्था को भी पहुंचेगा। इससे सभी देश ट्रेड करना आसान हो जाएगा। 

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