India के कई पड़ोसियों समेत 75 देशों को अमेरिकी वीजा देने पर ट्रंप ने लगाई रोक, इन देशों के लोगों को बताया बोझ

By नीरज कुमार दुबे | Jan 16, 2026

अमेरिका ने अपनी आव्रजन नीति में एक बडा और विवादास्पद फैसला लेते हुए 75 देशों से होने वाली इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। हम आपको बता दें कि इस सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार इन देशों से आने वाले प्रवासी अमेरिकी जनता के कल्याण संसाधनों पर अस्वीकार्य स्तर तक निर्भर हो जाते हैं और आगमन के तुरंत बाद ही सार्वजनिक बोझ बनते हैं।

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दूतावास और वाणिज्य दूतावास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नए आवेदनों को अस्वीकार करें जब तक कि स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता। इस रोक की अवधि को लेकर कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। देखा जाये तो यह कदम दुनिया के लगभग दो सौ देशों में से एक तिहाई से अधिक देशों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद करने जैसा है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि विभाग अपने दीर्घकालिक अधिकारों का उपयोग करते हुए ऐसे संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित करेगा जो अमेरिकी जनता की उदारता का दुरुपयोग कर सकते हैं। हम आपको बता दें कि इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने वीजा जांच प्रक्रिया को और कठोर किया था और पिछले वर्ष आवेदकों के सोशल मीडिया खातों की भी जांच अनिवार्य कर दी गई थी। यह फैसला उस व्यापक आव्रजन प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है जिसे ट्रंप ने पिछले वर्ष जनवरी में सत्ता संभालने के बाद तेज किया है। नवंबर में व्हाइट हाउस के पास एक गोलीबारी की घटना के बाद उन्होंने थर्ड वर्ल्ड देशों से आव्रजन को स्थायी रूप से रोकने की बात कही थी। इसके साथ ही सोमाली नागरिकों को मिलने वाली निर्वासन सुरक्षा भी समाप्त की जा रही है।

देखा जाये तो अमेरिका का यह फैसला केवल एक आव्रजन नीति नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में बदलते संतुलन का संकेत है। ट्रंप प्रशासन इसे आर्थिक सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की रक्षा के नाम पर पेश कर रहा है लेकिन इसके निहितार्थ इससे कहीं अधिक गहरे हैं। 75 देशों पर एक साथ रोक लगाना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब वैश्वीकरण की अपनी पुरानी भूमिका से पीछे हटकर सख्त राष्ट्रकेंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।

सामरिक दृष्टि से देखें तो यह कदम अमेरिका की सॉफ्ट पावर को कमजोर कर सकता है। दशकों से अमेरिका दुनिया भर के प्रतिभाशाली युवाओं और कामगारों के लिए अवसर की भूमि रहा है। वीजा रोक से न केवल मानव पूंजी का प्रवाह रुकेगा बल्कि उन देशों में अमेरिका के प्रति धारणा भी नकारात्मक होगी जिनके नागरिकों को सीधे निशाना बनाया गया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में पहले से ही चीन और रूस जैसे शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। ऐसे में अमेरिका का यह कदम प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के लिए कूटनीतिक अवसर खोल सकता है।

दूसरी ओर घरेलू राजनीति में यह फैसला ट्रंप के मूल समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देता है कि उनकी सरकार अमेरिकी करदाताओं के हितों को सर्वोपरि रखेगी। सार्वजनिक बोझ की दलील राजनीतिक रूप से प्रभावी हो सकती है लेकिन इसका तथ्यात्मक आधार हमेशा विवाद के घेरे में रहा है। कई अध्ययनों ने दिखाया है कि प्रवासी लंबे समय में अर्थव्यवस्था में योगदान भी करते हैं।

भारत जैसे देशों के लिए यह फैसला सीधे तौर पर लागू नहीं होता लेकिन अप्रत्यक्ष प्रभाव अवश्य होंगे। वैश्विक आव्रजन सख्ती का रुझान अन्य पश्चिमी देशों को भी प्रभावित कर सकता है। साथ ही दक्षिण एशिया में अस्थिरता और बेरोजगारी के दबाव और बढ़ सकते हैं जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां जन्म ले सकती हैं।

बहरहाल, यह फैसला अमेरिका की सामरिक सोच में आ रहे बदलाव को रेखांकित करता है जहां आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण को वैश्विक नेतृत्व से ऊपर रखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह संकुचित दृष्टि लंबे समय में अमेरिका को मजबूत बनाएगी या उसे दुनिया में और अलग थलग कर देगी। यही इस निर्णय की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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