Trump का 'धर्मयुद्ध', ईरान के लिए US प्रेसिडेंट से क्यों भिड़ गए पोप

By अभिनय आकाश | Apr 16, 2026

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस जंग को एक 'धर्म युद्ध' की तरह पेश कर रहा है, जिसमें ट्रम्प को एक मसीहा के रूप में दिखाया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अंदर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कमांडर्स सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार करने हेतु बाइबल और 'दुनिया के अंत' जैसी धार्मिक बातों का सहारा ले रहे हैं। जहाँ एक तरफ व्हाइट हाउस में पास्टर्स ट्रंप की शक्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कैथोलिक धर्मगुरु पोप लियो ने इस युद्ध को नेताओं का अहंकार बताकर इसकी कड़ी निंदा की है। इस वैचारिक मतभेद के कारण ट्रंप और पोप के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है, जिससे यह पूरा संघर्ष अब राजनीति से हटकर धर्म के केंद्र पर आ टिका है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे आधुनिक युद्ध को धार्मिक कट्टरता और 'आर्मागडन' जैसी प्राचीन मान्यताओं से जोड़ा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की वो ट्रुथ सोशल वाली पोस्ट जिसमें उन्होंने खुद को एक मसीहा की तरह दिखाया।  प्रेयर्स में कहा गया हम आपकी यानी ईश्वर की कृपा और हमारे सैनिकों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं और हमारी सशस्त्र सेनाओं में सेवा दे रहे हमारे सारे पुरुषों और महिलाओं के लिए भी हे परमपिता ईश्वर हम प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे राष्ट्रपति ट्रम्प को वो ताकत देते रहे जिसकी उन्हें जरूरत है ताकि वो हमारे महान राष्ट्र का नेतृत्व कर सकें। ओवल ऑफिस से शायद ही पहले किसी युद्ध के बीच इस तरह का वीडियो पब्लिक डोमेन में आया हो। जैसा ट्रंप के लिए प्रार्थना का वीडियो ईरान से जंग के बीच आया। 

धर्म युद्ध की तरह ईरान वॉर को दिखाने की कोशिश

अमेरिकन अथॉरिटीज या तो इसे एक धर्म युद्ध की तरह खुद देख रही है या फिर दिखाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन अगर कैथोलिक क्रिश्चियन के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो की बातों पर गौर करें तो वो साफ-साफ इस युद्ध के खिलाफ हैं। यही वजह है कि डॉनल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन खुले शब्दों में पोप लियो के खिलाफ बोल रहा है। इस तकरार की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी लेकिन 11 अप्रैल को ये एक बड़े स्तर पर पहुंच गई। तब पोप लियो ने एकदम कड़े शब्दों में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग सर्वशक्तिमान होने के भ्रम की वजह से बढ़ाई जा रही है। ट्रंप की ओर इशारा था शायद और उन्होंने इस सोच की निंदा की। साथ ही पोप लियो ने अमेरिकी नेताओं से जंग रोकने और शांति के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की मांग की। 

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हथियार नहीं इंसाफ और करुणा से ही आएगी शांति

पोप लियो XIV ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को युद्ध और हिंसा की सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज दुनिया को जो संदेश सुनने की जरूरत है”, वह शांति और संवाद का है। कैमरून की यात्रा पर रवाना लियो ने पोप के विशेष विमान में संवाददाताओं से बातचीत में यह टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने न तो ट्रंप के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया और न ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस सुझाव का कि पोप को धर्मशास्त्र के बारे में बोलते समय “सावधानी बरतनी चाहिए।” लियो ने सवालों के जवाब देने से भी परहेज किया। इसके बजाय उन्होंने अल्जीरिया की अपनी यात्रा और हिप्पो के संत ऑगस्टीन की शिक्षाओं के बारे में बात की, जो उनके आध्यात्मिक प्रेरणास्रोत थे। हालांकि, लियो ने कुछ ऐसी टिप्पणियां भी कीं, जिनसे संकेत मिलता है कि उन्होंने ईरान युद्ध को लेकर शांति की अपनी अपील को लेकर ट्रंप प्रशासन की ओर से की गई आलोचनाओं को नजरअंदाज नहीं किया है। ट्रंप ने पिछले कुछ दिनों में पोप पर लगातार तीखे हमले किए हैं। उन्होंने लियो पर अपराध के खिलाफ कमजोर रुख अपनाने और वामपंथियों के प्रभाव में होने का आरोप लगाया है।

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ट्रंप ने पोप के रुख को बताया वास्तविकता से दूर

डोनाल्ड ट्रंप ने पोप के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल के महीनों में हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार दिया है और ऐसे देश को परमाणु हथियार हासिल करने देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। ल ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोप की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि पोप का रुख वास्तविकता से दूर है। ट्रंप ने पहले भी पोप की आलोचना करते हुए उन्हें कमजोर बताया था और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि वे पोप की राय से सहमत नहीं हैं और अपनी नीतियों पर कायम रहेंगे।

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