Prabhasakshi NewsRoom: Iran पर आर-पार के मूड में Trump! छुट्टी रद्द कर लौटे White House, बैठकों का दौर जारी, दुनिया टेंशन में

By नीरज कुमार दुबे | Sep 21, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अब ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। सप्ताहांत की अपनी छुट्टियां बीच में ही रद्द कर राष्ट्रपति ट्रंप शनिवार रात कैंप डेविड से अचानक व्हाइट हाउस लौट आए और इसके बाद वॉशिंगटन में ईरान को लेकर उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला तेज हो गया। अमेरिकी मीडिया की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन तेहरान के खिलाफ अगले कदम पर गंभीरता से विचार कर रहा है जिसमें सैन्य कार्रवाई को तेज करना, आर्थिक दबाव और समुद्री नाकेबंदी को और कड़ा करना जैसे विकल्प शामिल हैं। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार कैंप डेविड में भी ईरान युद्ध के अगले चरण पर चर्चा हुई और ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह ईरान को लेकर बड़े फैसले के बेहद करीब हैं।

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लेकिन जमीन पर हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन हमलों ने ईरान के आसपास मौजूद अमेरिका के अधिकांश सैन्य ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया है। उसके प्रवक्ता हुसैन मोहब्बी के मुताबिक, अमेरिकी सेना को अपने जवानों और सैन्य उपकरणों को ईरान से दूर स्थित ठिकानों पर स्थानांतरित करना पड़ा है। उन्होंने जॉर्डन के मुफ्फाक सल्ती हवाई अड्डे का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां पहुंचने के बाद भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरानी हमलों की पहुंच से बाहर नहीं हैं।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक और अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है। यह दावा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य टकराव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

वहीं युद्ध का आर्थिक झटका ईरान के भीतर भी गहरा होता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की अर्थव्यवस्था में दस प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऊर्जा निर्यात पर दबाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान ने संकट को और गंभीर बना दिया है। यानी अमेरिका और ईरान की लड़ाई अब केवल मिसाइलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था तक पहुंच चुका है।

सबसे खतरनाक पहलू यह है कि संघर्ष का दायरा ईरान और अमेरिका की सीधी भिड़ंत से बाहर निकल रहा है। ईरान समर्थित यमनी हूती संगठन ने यमन में अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करते हुए सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। राजधानी रियाद को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबरों ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के महत्वपूर्ण शहरों और नागरिक ठिकानों के आसपास भी हमलों की आशंका पैदा हो गई है। बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों का बढ़ता प्रभाव वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए एक और गंभीर खतरा है।

इस बीच, अमेरिका ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को तत्काल ईरान छोड़ने की चेतावनी दी है। अमेरिकी दूतावास के सुरक्षा अलर्ट में साफ कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक किसी भी कारण से ईरान की यात्रा न करें और जो अमेरिकी नागरिक अभी ईरान में हैं, वे तुरंत वहां से निकल जाएं। साथ ही, पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने और उड़ानें रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने तथा सीमा व्यवस्था में अचानक बदलाव जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

इसके अलावा सऊदी अरब को लेकर अमेरिका ने अलग सुरक्षा चेतावनी जारी की है। वहां अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू की यात्रा के लिए विशेष अनुमति लेने को कहा गया है, जबकि सऊदी अरब के लिए अमेरिकी यात्रा सलाह पहले से ही ‘यात्रा पर पुनर्विचार’ की श्रेणी में है। यह चेतावनी ईरान के साथ सीधे युद्ध से अलग, ईरान समर्थित हूती हमलों के सऊदी अरब तक फैलने के कारण जारी की गई है। हम आपको बता दें कि सऊदी अरब में भी सुरक्षा चिंता बढ़ गई है। रियाद की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने का दावा किया गया है, जबकि बिश, ताइफ, फरासन और यानबू जैसे इलाकों में नागरिकों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की खबरें सामने आई हैं।

रणनीतिक रूप से देखें तो यह टकराव अब तीन बेहद संवेदनशील मोर्चों पर फैल चुका है। ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य ठिकाने, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से जुड़ा बाब-अल-मंदब मार्ग। इन तीनों में किसी एक पर भी बड़े पैमाने पर सैन्य व्यवधान पैदा हुआ तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।

देखना होगा कि ट्रंप की कठोर धमकियां बातचीत की मेज तक जाएंगी या एक और बड़े सैन्य टकराव का रास्ता खोलेंगी। ईरान ने जिस तरह अमेरिकी ठिकानों और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित लक्ष्य बताकर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, उससे साफ है कि अगला हमला हुआ तो संघर्ष केवल दो देशों के बीच सीमित रहने की गारंटी नहीं है। होर्मुज से लेकर रियाद और बाब-अल-मंदब तक खिंचती यह युद्धरेखा अब वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम बनती जा रही है।

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