By अभिनय आकाश | Jan 08, 2026
अमेरिका के साथ ट्रेड डील और भारी भरकम एकतरफा टैरिफ लगाए जाने के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि यह पहली बार नहीं है, जब भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। लक्जमबर्ग के दौरे के वक्त वहां भारतीय में डायस्पोरा के साथ हुए संवाद में विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में ऐसा कहा। हालांकि इस दौरान उन्होंने अमेरिका का नाम नहीं लिया जयशंकर ने इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के वक्त हुए 1998 के परमाणु परीक्षणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस वक्त देश के राजनीतिक नेतृत्व ने जब ये फैसला लिया तो ये कोई आसान निर्णय नहीं था।
भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि उस वक्त भी भारत के खिलाफ प्रतिबंध और दूसरे कड़े निर्णय देखे गए। जयशंकर ने आगे कहा कि देशों को इन सब चुनौतियों के बावजूद कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और उन पर कायम रहना पड़ता है। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि आज के वक्त में देश वही काम करते हैं. जिनसे उनका सीधा फायदा होता है, लेकिन दूसरों को फ्री की सलाह दी जाती है।
जयशंकर ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग कैंप मौजूद रहे। ये गुप्त तरीके से वहां मौजूद नहीं थे बल्कि पाकिस्तान के बड़े शहरों में चल रहे थे, वहां की सरकार और सेना ने आतंक को सपोर्ट किया। पाकिस्तान इसे इस तरह से नॉर्मलाइज करता है, जैसा कि ऐसा करना उनका अधिकार हो।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते इस वक्त ऐसी ढलान पर हैं जहां तनाव हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी और टेरिफ बढ़ाने की धमकियां अब सिर्फ जुबानी नहीं रही।यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से जमकर सस्ता कच्चा तेल खरीदा है। लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त करने के मूड में नहीं। इस नए बिल के तहत एक बेहद खतरनाक प्रावधान जोड़ा गया है। अगर रूस शांति वार्ता के लिए नहीं झुकता तो रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 500% तक का टेरिफ लगा सकता है। और क्योंकि भारत पर अमेरिका ने पहले ही रूसी तेल को लेकर अतिरिक्त टेरिफ लगाए हैं।