By रेनू तिवारी | May 22, 2026
वैश्विक राजनीति इन दिनों किसी संस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसी हो गई है, जिसके डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और इकलौते अभिनेता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद हैं। दुनिया भर के रणनीतिकार और कूटनीतिक पंडित रात को इस सुकून के साथ सोते हैं कि सब नियंत्रण में है, लेकिन सुबह ट्रुथ सोशल (Truth Social) का एक नोटिफिकेशन पूरे 'वर्ल्ड ऑर्डर' की धज्जियां उड़ा देता है। कभी नाटो सहयोगियों को सुरक्षा का बिल थमा दिया जाता है, तो कभी ईरान से लेकर यूरोप तक की सैन्य रणनीतियां एक ही ट्वीट (या पोस्ट) में बदल जाती हैं। दोस्त हैरान हैं, दुश्मन परेशान हैं और अंतरराष्ट्रीय नीतियां किसी रोलर-कोस्टर राइड की तरह ऊपर-नीचे हो रही हैं। ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया की कूटनीति अब किसी ठोस रणनीति पर नहीं, बल्कि वॉशिंगटन के मूड-स्विंग्स और पर्सनल केमिस्ट्री के भरोसे चल रही है!
ट्रंप की सोशल मीडिया घोषणा से यूरोपीय सहयोगियों के लिए अनिश्चितता और बढ़ गई जो इन बदलावों से प्रभावित हुए हैं क्योंकि इससे पूर्व अमेरिकी प्रशासन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सदस्यों पर अपनी रक्षा का पर्याप्त भार नहीं उठाने और ईरान युद्ध में समर्थन देने में विफल रहने की शिकायत कर चुका है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा, ‘‘पोलैंड के वर्तमान राष्ट्रपति करोल नवरोकी के सफल चुनाव के आधार पर और उनके साथ हमारे संबंधों को देखते हुए, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका पोलैंड में अतिरिक्त 5,000 सैनिक भेजेगा।’’
कुछ दिन पहने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा था कि ईरानी नेतृत्व द्वारा अमेरिका का ‘अपमान’ किया जा रहा है और उन्होंने युद्ध में रणनीति की कमी की आलोचना की थी जिसके बाद ट्रंप और पेंटागन ने कहा था कि वे जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या घटा रहे हैं। ट्रंप ने फिर महीने की शुरुआत में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका 5,000 से कहीं अधिक सैनिकों की संख्या में कटौती करेगा। पिछले सप्ताह तक सेना की दूसरी बख्तरबंद ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, पहली कैवलरी डिवीजन के लगभग 4,000 सैनिक पोलैंड के लिए रवाना नहीं हुए थे।
‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) ने बताया कि यह तैनाती रद्द करना यूरोप में सैनिकों की संख्या कम करने के ट्रंप के आदेश का पालन करने के प्रयास का हिस्सा था। लंबी दूरी की मिसाइलें दागने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की जर्मनी में तैनाती भी रोक दी गई। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सांसदों ने इन कटौतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे यूक्रेन में चार साल से जारी युद्ध के दौरान सहयोगियों और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों को गलत संदेश जाएगा।
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