By रेनू तिवारी | May 22, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर मुंबई पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाला AI-जनरेटेड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निर्मित) वीडियो पोस्ट करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपी की पहचान नफीस आलम के रूप में की है। अधिकारियों के मुताबिक, यह विवादित वीडियो 19 मई को 'नफीस आलम' नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से अपलोड किया गया था।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में आरोपी के सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं: आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर नियमित रूप से बीजेपी-विरोधी और प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने वाला कंटेंट पोस्ट किया जाता था। इस प्रोफाइल के करीब 95,000 फॉलोअर्स हैं, जिसका मतलब है कि इसके द्वारा शेयर किए गए गुमराह करने वाले पोस्ट और वीडियो बहुत कम समय में लाखों लोगों तक पहुंच रहे थे। आरोपी ने पहले भी प्रधानमंत्री और पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए कई भ्रामक पोस्ट शेयर किए थे, लेकिन हालिया AI-जनरेटेड वीडियो बेहद आपत्तिजनक होने के कारण तुरंत सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आ गया।
मुंबई पुलिस के सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इस AI वीडियो और आरोपी के खाते पर मौजूद अन्य पोस्ट का गहन विश्लेषण (Analysis) किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि AI टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल करके किसी भी व्यक्ति को बदनाम करना, समाज में गलत जानकारी फैलाना या आपत्तिजनक कंटेंट शेयर करना एक गंभीर अपराध है। खासकर जब बात देश के प्रधानमंत्री या अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की हो, तो ऐसे मामलों को पुलिस अत्यंत गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह कोई पहली घटना नहीं है जब प्रधानमंत्री को निशाना बनाने के लिए डीपफेक का सहारा लिया गया हो। पिछले महीने ही केरल पुलिस की साइबर विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) के एक हैंडल के खिलाफ केस दर्ज किया था। उस मामले में भी एक AI-जनरेटेड वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को बेहद भ्रामक और बदनाम करने वाले तरीके से पेश किया गया था। वह मामला चुनाव आयोग की एक आधिकारिक शिकायत के बाद दर्ज हुआ था। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव और राजनीतिक सरगर्मियां बदलती हैं, वैसे-वैसे असामाजिक तत्वों द्वारा एआई और मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) वीडियो का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह करने की कोशिशें तेज हो जाती हैं, जिस पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।
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