ट्रम्प ने फिर दोहराया दावा: भारत–पाकिस्तान संघर्ष “मैंने रोका”, जबकि भारत करता रहा इनकार

By Ankit Jaiswal | Dec 10, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर भारत–पाकिस्तान तनाव को लेकर अपने पुराने दावे को दोहराते दिखाई दिए। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने पेन्सिलवेनिया के माउंट पोकोनो में आयोजित एक चुनावी सभा में कहा कि इस वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान “टकराव की स्थिति में थे” और उन्होंने इस संघर्ष को “खत्म कराया”। बता दें कि ट्रम्प इसी दावे को अब तक लगभग 70 बार दोहरा चुके हैं, जबकि भारत ने हर बार स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या थर्ड पार्टी हस्तक्षेप की बात नहीं होती है।

इसी भाषण में ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि “कंबोडिया और थाईलैंड फिर लड़ाई की स्थिति में हैं” और वह “कल फोन कर इसे भी रोक देंगे।” ट्रम्प के शब्दों में, वे इसे “शक्ति के माध्यम से शांति स्थापित करने” का तरीका बताते हैं, जो उनके अनुसार पहले भी कई देशों के बीच तनाव कम करने में कारगर रहा है।

इमिग्रेशन पर बोलते हुए ट्रम्प ने कहा कि 50 साल बाद पहली बार अमेरिका में “रिवर्स माइग्रेशन” देखने को मिल रहा है, जिससे “अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियां और वेतन में सुधार हुआ है, न कि अवैध प्रवासियों के लिए।” मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने तथाकथित “थर्ड वर्ल्ड माइग्रेशन” पर स्थायी रोक की भी घोषणा दोहराई और कुछ देशों के प्रवासियों को आर्थिक, सुरक्षा और सामाजिक खतरे का कारण बताया। इसी संदर्भ में उन्होंने अफगानिस्तान, हैती, सोमालिया और अन्य देशों को “खतरनाक क्षेत्र” कहते हुए अपमानजनक भाषा में उल्लेख किया, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी आलोचनाएँ हो चुकी हैं।

बता दें कि इसी माह अमेरिकी प्रशासन ने 19 उच्च–जोखिम देशों के लिए नई सुरक्षा स्क्रीनिंग गाइडलाइन जारी की है, जिनमें अफगानिस्तान, चाड, कांगो, क्यूबा, सोमालिया, सूडान, ईरान, लीबिया, वेनेज़ुएला और यमन शामिल हैं। ट्रम्प द्वारा जारी पूर्व राष्ट्रपति आदेश के तहत इन देशों से आने वाले प्रवासियों पर प्रतिबंध और सख़्त जांच पहले से लागू है। इन प्रावधानों का आधार यह बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद–नियंत्रण और जन–सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कई मानवाधिकार संगठनों ने इस नीति को पक्षपाती और असंतुलित बताया है।

ट्रम्प के बयानों के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई बार भारत ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशिया की सामरिक और सीमा संबंधी संवेदनाएँ संवैधानिक संप्रभुता और कूटनीतिक संवाद की शर्तों पर आधारित हैं और किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा समाधान का दावा वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकता है, क्योंकि यह संबंध दो देशों की संप्रभु संरचना के भीतर ही प्रबंधित किए जाते हैं।

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