By अभिनय आकाश | Feb 21, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके द्वारा बनाया गया बोर्ड ऑफ पीस पर भारत का रिएक्शन अब आ गया है। जिसने पूरी दुनिया को एक अलग संदेश दिया है। जहां इस संगठन की पहली बैठक में भारत की मौजूदगी ने कूटनीतिक गलियारों में दिलचस्प चर्चा शुरू कर दी। दरअसल भारत ने इस बैठक में सदस्य के रूप में नहीं बल्कि एक ऑब्जर्वर नेशन यानी कि पर्यावेक्षक देश के तौर पर शामिल हुआ है। वाशिंगटन डीसी स्थित डोनाल्ड जे ट्रंप इंस्टट्यूट ऑफ पीस में आयोजित इस बैठक में भारतीय दूतावास की चार डी अफेयर्स नमज्ञा खंपा ने इस बैठक में हिस्सा लिया। यह बोर्ड ऑफ पीस गाज़ा के पुनर्निर्माण और संघर्ष समाधान के नाम पर बनाया गया है। ट्रंप ने इसके लिए $ अरब डॉलर देने की घोषणा की है और इस बोर्ड में 27 देश शामिल बताए जा रहे हैं। जिनमें पाकिस्तान, सऊदी अरेबिया, यूनाइटेड अरब एमरा और अर्जेंटीना जैसे देश शामिल हैं।
ऐसे में भारत का सतर्क रुख समझ में आता है क्योंकि भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुधार का समर्थक रहा है और बहुपक्ष व्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका चाहता है क्योंकि ऐसे किसी भी संगठन में स्वतंत्र रूप से अपना मत रखना संभव नहीं होगा जो कि किसी एक व्यक्ति के इशारे पर चलती है और भारत किसी के भी दबाव में आकर काम नहीं करता इसलिए भारत के ऐसे संगठन से दूरी भी जरूरी है। अब इस संगठन को लेकर भारत की न्यूट्रल अप्रोच एक संदेश है जो कि यह बता रही है कि नई दिल्ली हर वैश्विक पहल को खुले मन से देखती है लेकिन बिना सोचे समझे किसी धड़े का हिस्सा बिल्कुल नहीं बनती है।
गाज़ा संकट हो या वैश्विक शांति की पहल भारत का फोकस साफ रहा है। संवाद संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता यानी भारत इस बोर्ड को देख रहा है, समझ रहा है लेकिन अभी दूरी बनाकर रखा है। यही है भारत की कूटनीतिक चाल।