पाकिस्तान की सत्ता का 'सच'! Fawad Chaudhry का दावा- मुनीर ही हैं असली बॉस, शहबाज़ को अमेरिका ने किया दरकिनार

By रेनू तिवारी | Apr 16, 2026

पाकिस्तान की राजनीति और सत्ता के गलियारों में छिपी 'असली हकीकत' एक बार फिर दुनिया के सामने आ गई है। इमरान खान सरकार में सूचना मंत्री रहे फवाद चौधरी ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा है कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार महज एक दिखावा है और देश की असली बागडोर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के हाथों में है। 

चौधरी, जो पहले इमरान खान की सरकार में सूचना मंत्री रह चुके हैं, ने तर्क दिया कि पाकिस्तान में सत्ता का संतुलन सेना के पक्ष में बहुत ज़्यादा झुका हुआ है। हाल के घटनाक्रमों का ज़िक्र करते हुए चौधरी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनरल मुनीर को पाकिस्तान का नेता बताया, जबकि शरीफ़ के नाम का कोई ज़िक्र नहीं किया।

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ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। इस बातचीत का मकसद तनाव कम करना और मध्य-पूर्व में संघर्ष-विराम की दिशा में काम करना है।

"साफ़-साफ़ कहूँ तो, इस बारे में कोई दो राय नहीं है। अभी पाकिस्तान का नेतृत्व जनरल आसिम मुनीर कर रहे हैं। वही पाकिस्तान के असली नेता हैं। अभी फ़ैसले लेने का अधिकार फ़ील्ड मार्शल या CDF के पास है... कल भी, राष्ट्रपति ट्रंप ने असल में जनरल आसिम मुनीर को ही पाकिस्तान का नेता बताया था, और उन्होंने शहबाज़ शरीफ़ के बारे में बात करने की ज़हमत भी नहीं उठाई," मुनीर के सत्ता की बागडोर संभालने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने यह बात कही।

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बातचीत के दूसरे दौर को आगे बढ़ाने के लिए मुनीर ईरान में हैं

पाकिस्तान चल रही क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए नए सिरे से कोशिश कर रहा है, क्योंकि बातचीत का पहला दौर बेनतीजा रहने के बाद अब नए सिरे से चर्चा की योजना बनाई जा रही है। मुनीर अभी ईरान में हैं, जहाँ वे तेहरान के अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।

इस दौरे का मुख्य मकसद बातचीत के दूसरे दौर की संभावनाएँ तलाशना है, क्योंकि पहले की कोशिशों से कोई नतीजा नहीं निकला था। अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि बातचीत का अगला दौर पाकिस्तान में हो सकता है।

हालाँकि, विश्लेषक पाकिस्तान की भूमिका को सावधानी से देख रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि देश क्षेत्रीय मामलों में मध्यस्थ बनकर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान पर आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाह देने के आरोपों को लेकर दुनिया भर में उसकी आलोचना जारी है।

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