US के लिए बहुत बड़ा परमाणु खतरा है Pakistan, Tulsi Gabbard के खुलासे के बाद Donald Trump ने पकड़ा माथा

By नीरज कुमार दुबे | Mar 19, 2026

अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गाबार्ड के ताजा बयान ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता भी बढ़ा दी है। हम आपको बता दें कि तुलसी गाबार्ड ने साफ शब्दों में पाकिस्तान, रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान को अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरे के रूप में चिन्हित किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान, जो खुद को शांति का समर्थक बताने की कोशिश करता है और ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल है, वह अब सीधे तौर पर अमेरिका के लिए परमाणु खतरे के रूप में देखा जा रहा है। हम आपको याद दिला दें कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दक्षिण एशिया का रक्षक बताया था, लेकिन उसी समय अमेरिकी खुफिया तंत्र पाकिस्तान को संभावित खतरे की श्रेणी में रख रहा है। यह दोहरी नीति पाकिस्तान की रणनीतिक चालों को उजागर करती है।

इसे भी पढ़ें: China जा रहे तेल के 7 जहाज रूस ने मोड़कर भारत भेजा, जिनपिंग को मोदी ने दिया बड़ा सदमा

रणनीतिक दृष्टि से देखें तो चीन और रूस पहले से ही अमेरिका के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन अब उत्तर कोरिया और पाकिस्तान का इस सूची में मजबूती से शामिल होना एक नई धुरी के निर्माण की ओर इशारा करता है। खासकर उत्तर कोरिया का रूस और चीन के साथ बढ़ता गठजोड़ एक सामूहिक सैन्य शक्ति का रूप ले सकता है। यह गठबंधन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि तकनीकी और सैन्य सहयोग का भी संकेत देता है, जिससे भविष्य में समन्वित हमलों की आशंका बढ़ जाती है।

ईरान के संदर्भ में अमेरिका ने दावा किया है कि उसने वर्ष 2025 में उसके परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। तुलसी गाबार्ड ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान और उसके सहयोगी अभी भी मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। यदि ईरानी शासन बना रहता है, तो वह धीरे-धीरे अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से खड़ा कर सकता है।

यह पूरा परिदृश्य बताता है कि दुनिया अब बहुध्रुवीय शक्ति संघर्ष के सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जहां पहले शीत युद्ध केवल दो महाशक्तियों के बीच था, वहीं अब कई देश एक साथ हथियारों की होड़ में शामिल हो चुके हैं। यह स्थिति किसी भी समय बड़े टकराव का रूप ले सकती है।

भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान का नाम इस सूची में आना केवल अमेरिका की चिंता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत है। यदि पाकिस्तान अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है, तो इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर पड़ेगा। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा नीति को और अधिक आक्रामक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा।

इसके रणनीतिक निहितार्थ भी गंभीर हैं क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की दौड़ तेज होगी। इसके अलावा, नए सैन्य गठबंधन बनेंगे जो शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देंगे। साथ ही, क्षेत्रीय संघर्ष अब वैश्विक टकराव में बदल सकते हैं और परमाणु हथियारों का खतरा अब केवल डर नहीं बल्कि वास्तविक संभावना बन चुका है।

देखा जाये तो यह समय केवल बयानबाजी का नहीं, बल्कि ठोस रणनीतिक फैसलों का है। अमेरिका का यह खुलासा एक चेतावनी है कि आने वाला दशक दुनिया के लिए निर्णायक होगा। जो देश इस बदलते परिदृश्य को समझेंगे और समय रहते अपनी रणनीति मजबूत करेंगे, वही इस खतरनाक खेल में टिक पाएंगे। दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर कदम, हर निर्णय और हर गठबंधन आने वाले युद्ध या शांति की दिशा तय करेगा। सवाल यह नहीं है कि खतरा कितना बड़ा है, बल्कि यह है कि दुनिया इस खतरे का सामना करने के लिए कितनी तैयार है।

प्रमुख खबरें

SEBI Order के खिलाफ SAT पहुंचे Zee Entertainment और Punit Goenka, बुधवार को होगी अहम सुनवाई

Lionel Messi को चैंपियन बनाने वाले पिता Jorge Messi का निधन, दिग्गज Rafael Nadal ने जताया गहरा शोक

Aston Villa छोड़ PSG लौटे Lucas Digne, 11 साल बाद फिर पहनेंगे पेरिस की जर्सी, 2029 तक हुआ Deal साइन

5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal