By अभिनय आकाश | May 15, 2025
ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देकर तुर्की ने खुद के पैर पर कुल्हाड़ी नहीं बल्कि कुल्हाड़ी पर ही पैर मार दिया है। भारत से पंगा लेना तुर्की को भारी पड़ सकता है। इसका असर भी दिखने लगा है। भारत में तुर्की के बायकाट की मांग उठने लगी है। मध्य प्रदेश के विदिशा में लोग सड़कों पर उतरे और तुर्की के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। जगह जगह तुर्की के सामानों के बहिष्कार के पोस्टर लगाए गए। तुर्की के खिलाफ नारेबाजी की गई और लोगों ने पुतला फूंक कर अपनी नागाजगजी जताई। तुर्की को लेकर लोगों में काफ नाराजगी है। तुर्की में बने ड्रोन जिन्होंने भारत को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। तुर्की की तरफ से पाकिस्तान के समर्थन में बयानबाजी भी की गई। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है जब तुर्की मुसीबत में था तो पाकिस्तान नहीं बल्कि हिंदुस्तान मदद का हाथ लेकर सबसे पहले पहुंचा था।
तुर्की को हजारों करोड़ रुपए करोबार के रूर में टूरिज्म के रूप में मिलते थे। वो अब नहीं मिलेंगे। ये हिंदुस्तानियों ने तय कर लिया जाएगा। लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति एर्गोगान फिर भी बेफ्रिक हैं। उन्होंने पाकिस्तान के समर्थन जारी रखने की बात कही है। एर्दोगान वो शख्स हैं जिन्होंने तुर्की की इकोनॉमी का बंटाधार कर दिया। जाहिर सी बात है कि ऐसे सनकी शख्स का बयान आना लाजिमी था। उन्होंने कहा है कि हम पाकिस्तन का समर्थन करते रहेंगे। हम नुकसान के बारे में नहीं सोचते हैं। एर्दोगन ने फिर से अपने भाई पाकिस्तान को अटूट समर्थन दिया और पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपना अनमोल भाई बताया।
इससे पहले शहबाज शरीफ ने अपने एक्स अकाउंट पर तुर्की के नेताओं को पाकिस्तान के प्रति उनके “मजबूत समर्थन और अटूट एकजुटता” तथा दोनों देशों के बीच “भाईचारे के संबंधों” को बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया था। शहबाज ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि मैं अपने प्रिय भाई राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन द्वारा पाकिस्तान को दिए गए मजबूत समर्थन और अटूट एकजुटता से बहुत प्रभावित हुआ। पाकिस्तान को तुर्की के साथ अपने दीर्घकालिक, समय-परीक्षणित और स्थायी भाईचारे के संबंधों पर गर्व है, जो प्रत्येक नई चुनौती के साथ और मजबूत होते गए हैं।
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