3 मुस्लिम राष्ट्रों ने चला बड़ा दाँव, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan के बीच Defence Pact से दुनिया हैरान

By नीरज कुमार दुबे | Aug 07, 2026

पश्चिम एशिया में युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज मुस्लिम दुनिया के तीन महत्वपूर्ण देश तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान एक ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाने पर लिया है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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करीब एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद यह समझौता अंतिम रूप तक पहुंचा है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ईरान के साथ जारी संघर्ष ने खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोरियों को उजागर कर दिया है। साथ ही, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

हालांकि समझौते के सभी प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इससे सुन्नी मुस्लिम देशों के बीच सामरिक और सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह गठजोड़ क्षेत्र में उभरते नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जा रहा है।

तीनों देशों की सामरिक क्षमता इस समझौते को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। तुर्किये नाटो का सदस्य है और उसकी सैन्य क्षमता पश्चिम एशिया में सबसे मजबूत मानी जाती है। वहीं सऊदी अरब अमेरिका का प्रमुख सहयोगी होने के साथ दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली शक्ति है। वहीं पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न मुस्लिम देश है।

रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंकारा क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मंच के पक्ष में है। ऐसे में यह नया रक्षा समझौता उसी रणनीतिक सोच का विस्तार माना जा रहा है।

गौरतलब है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से ही एक रक्षा समझौता मौजूद है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है और आवश्यकता पड़ने पर "सभी सैन्य साधनों" के उपयोग का प्रावधान है। अब तुर्किये के इस ढांचे से जुड़ने के बाद पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के बीच यह रक्षा गठबंधन केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की रक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है। देखा जाये तो ऐसे समय में जब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है, यह समझौता आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।

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