By अभिनय आकाश | Jun 17, 2026
भारत और थाईलैंड के बीच में जो सहमति बनी है वो क्रांतिकारी साबित हो सकती है। तो वहीं अपने मित्र के साथ यानी कि ब्राजील अपने दोस्त भारत के साथ ऐसे प्लान तैयार करना चाह रहा है जो वाकई में बहुत बड़ा गेम चेंजर मूव साबित हो सकता है। चाइना के सामने एक बड़ी चुनौती भारत है। थाईलैंड भी सतर्क है क्योंकि साउथ चाइना सी का खतरा लगातार बढ़ता चला जा रहा है। तो भारत और थाईलैंड के बीच में डिफेंस डायलॉग हुआ है और यह बहुत अहम बैठक है और 2025 में दोनों देशों के अपने संबंध को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया और अब रक्षा सहयोग को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी है। ब जो चर्चाएं हुई हैं, भारत और थाईलैंड के बीच में जो बैठक हुई, उसमें यह तय हुआ है कि साझा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर काम करते हैं। रिसर्च इनोवेशन पर काम करते हैं। कोऑपरेशन बढ़ाते हैं। यानी कि जो मिलिट्री टू मिलिट्री एक्सचेंज है, ट्रेनिंग एक्सचेंज हैं, उसमें तेजी आने वाली है। एक तो इंडोपेसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग अगर बढ़ेगा तो भारत और थाईलैंड दोनों को ही हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में बहुत महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति में रखेगा। इस बैठक में दोनों देशों के बीच इंडोपेसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा भी हुई है। इसका मतलब है समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाना।
एशियन देशों में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों पे भारत की भूमिका मजबूत होगी। इसके अलावा जो जैसा कि हमने आपको बताया कि स्टेट ऑफ मलक्का जो है इससे हमको फायदा मिल सकता है। थाईलैंड जैसे देश के साथ हमारे संबंध बेहतर होंगे तो हमारी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप भी लगातार बढ़ी है। दोनों देशों के बीच सेनाएं जो है नियमित संपर्क में है। आर्थिक रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। तो काफी ज्यादा जो है वो फायदा हो सकता है। तो ये तो देखिए थाईलैंड के मोर्चे की खबर है। जहां एक बड़ा गेम चेंजर जो है डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और साझा को प्रोडक्शन की बात की जा रही है। बहुत बड़ा गेम चेंजर है ये। तो वहीं दूसरी तरफ ब्राजील की कंपनी है इमरार वो एक बड़ा ऑफर लेकर आई है जो सूत्र बता रहे हैं। मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए वो अपना C390 मिलेनियम विमान की जो है वो पेशकश कर ही रहा है।
भारत अगर इसे चुनता है तो कंपनी भारत में अपनी पूरी असेंबली लाइन उत्पादन सुविधा सब लाने के लिए तैयार हो गई है। यानी कि पूरा का पूरा वह यहीं बना देगी उसको। भारत को 60 से 80 के बीच मध्य परिवहन विमानों की आवश्यकता बताई गई है और इसके पहले भी अह यह जो कंपनी है इसकी और अडानी डिफेंस एंड एयरपेस के बीच में जो है वो भारत में क्षेत्रीय यात्री विमानों के निर्माण सप्लाई चेन प्रशिक्षण रखरखाव के लिए समझौता हुआ है और इसके आने से जो है एक बड़ा फायदा जो है वह मिल सकता है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पुराने AN32 परिवहन विमानों का जो है अह उसकी जगह पर इनको लाया जाएगा। AN32 के साथ एक दुखद घटना भी हुई। देखा आपने आसाम में। हालांकि उसकी जांच जारी है कि क्या कारण रहे होंगे। भारत में विमान निर्माण क्षमता बढ़ जाएगी अगर ऐसा होता है तो। एयररोस्पेस क्षेत्र में जो है भारत की तकनीक और कौशल जो है वह ट्रांसफर अगर होता है तो और बेहतरीन हो जाएगा। हजारों प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रोजगार मिल जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ ब्राजील की तरफ से भी ऑफर है। पूरी की पूरी सप्लाई यूनिटी लगा देने की हैं।