भारत में बनेगा राफेल विमान, हो गया बड़ा ऐलान!

राफेल कार्यक्रम पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई। हालांकि उन्होंने किसी नई डील या संख्या का खुलासा नहीं किया।
भारत जो अब एक तरह से रक्षा क्षेत्र में जो भारत का परिपेक्ष है वह यह है कि ज्यादा से ज्यादा आगे जाते हुए मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को आगे ले जाते हुए डेवलपमेंट को डिजाइन को प्रोडक्शन और को मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में जाना चाहते हैं और इस इसके चलते जितना जितना ज्यादा प्रोडक्शन जितना ज्यादा डिजाइन जितनी ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो सके उतना कितना अच्छा है और वो प्रेफरेंस रहेगी। पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैनुअल मैक्रों की मुलाकात में रक्षा सहयोग एक बार फिर प्रमुख एजेंडे में रहा। खासतौर पर राफेल लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा हुई। इस बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने खुद इस बात की जानकारी दी कि राफेल को लेकर भारत और फ्रांस के बीच चर्चा आगे बढ़ चुकी है और अब फोकस सिर्फ खरीद पर नहीं बल्कि भारत में निर्माण और तकनीक साझेदारी पर है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बताया कि पीएम मोदी और मैक्रों ने द्विपक्षीय संबंधों के लगभग सभी अहम क्षेत्रों पर चर्चा की। इसमें रक्षा, सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार, निवेश, तकनीक, इनोवेशन, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय शामिल रहे। राफेल कार्यक्रम पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई। हालांकि उन्होंने किसी नई डील या संख्या का खुलासा नहीं किया।
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लेकिन यह जरूर स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता अब रक्षा प्लेटफार्म खरीदने से आगे बढ़कर उन्हें देश में विकसित और निर्मित करने की है। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार मेक इन इंडिया, को डेवलपमेंट, को डिज़ाइन और को प्रोडक्शन के मॉडल पर जोर देते रहे हैं। यही सोच राफेल समेत भविष्य की सभी रक्षा परियोजनाओं में दिखाई दे रही है। भारत की वायु सेना राफेल को ऑपरेट करती है और उसके चलते दोनों देशों की सरकारों और दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच में बातचीत आगे बढ़ी है। जहां तक आपने राफेल के इंडीजनाइजेशन की बात की हमारा मानना हमेशा रहा है और प्रधानमंत्री जी ने भी अपने सारी जो उनकी मीटिंग्स हुई हैं। उनमें इस बात पे बल दिया है कि भारत जो अब एक तरह से रक्षा क्षेत्र में जो भारत का परिपेक्ष है वो ये है कि ज्यादा से ज्यादा आगे जाते हुए मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को आगे ले जाते हुए हम को डेवलपमेंट को डिजाइन को प्रोडक्शन और को मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में जाना चाहते हैं और इस इसके चलते जितना जितना ज्यादा प्रोडक्शन जितना ज्यादा डिजाइन जितनी ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो सके उतना अच्छा है और वह हमारी हमारी प्रेफरेंस रहेगी।
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विदेश सचिव ने यह भी कहा कि चाहे राइफल हो या कोई अन्य रक्षा प्लेटफार्म भारत चाहता है कि उसमें अधिकतम स्थानीय सामग्री स्थानीय निर्माण यानी कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय उद्योग की भागीदारी हो। भारत फ्रांस रक्षा सहयोग को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। आपको बता दें भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे जिसकाइस्तेमाल हमारी भारतीय वायुसेना कर रही है। यह विमान भारतीय वायुसेना के दो स्क्वाड्रन में शामिल है और अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात है। हाल के सालों में राफेल भारतीय वायुसेना की सबसे ताकतवर लड़ाकू क्षमता का अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा भारत ने नौसेना के लिए 26 राफेल एम विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी जो विमान वाहक पोतों से उड़ान भर सकेंगे। लंबे समय से 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना पर काम कर रही है। इस बहुचरर्चित परियोजना में राफेल प्रमुख दावेदार माना जा रहा है और भारत की कोशिश है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा सौदा होता है तो विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में बने और भारतीय कंपनियां भी उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा बने। विदेश सचिव के बयान को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। रही बात राफेल की खासियत की तो आपको बता दें यह 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक मल्टी रोल लड़ाकू विमान है। हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन में सक्षम है। मिडोर मिसाइल से लंबी दूरी पर दुश्मन के विमान को मार गिराने की क्षमता रखता है।
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