बिना वर्दी वाले हीरो Tyson Dog ने दिखाई अद्भुत वीरता, पैर में गोली लगने के बावजूद सीधे आतंकियों से भिड़ गया

By नीरज कुमार दुबे | Feb 24, 2026

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छतरू बेल्ट में चलाए गए बहुस्तरीय आतंकवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन त्राशी-1 में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस अभियान की सबसे प्रेरक कहानी जांबाज टॉयसन की है, जिसने गोली लगने के बावजूद अद्वितीय साहस दिखाते हुए आतंकियों के ठिकाने तक सबसे पहले पहुंचकर सुरक्षा बलों को निर्णायक बढ़त दिलाई।

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गोली लगने के बावजूद टॉयसन मिशन से पीछे नहीं हटा। वह सबसे पहले ढोक के पास पहुंचा और उसके साहस ने सुरक्षा बलों को ठिकाने तक सुरक्षित पहुंचने में मदद की। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को मार गिराया। घायल टॉयसन को बाद में हवाई मार्ग से इलाज के लिए ले जाया गया। फिलहाल वह उधमपुर में है और अधिकारियों के अनुसार उसकी स्थिति अब स्थिर है।

यह पूरा अभियान ऑपरेशन त्राशी-1 के नाम से चलाया गया, जिसे एक विशाल बहु एजेंसी आतंकवाद विरोधी अभियान बताया गया है। इसमें सेना की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त भागीदारी रही। अधिकारियों के मुताबिक यह अभियान कई महीनों की योजना और समन्वित रणनीति का परिणाम था।

जम्मू में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में जम्मू के आईजीपी बीएस टूटी ने बताया कि इस अभियान की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 में बनी, जब इजरायल ग्रुप नामक आतंकी संगठन के सात कट्टर आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर आए थे। डेढ़ वर्ष की अवधि में इन आतंकियों के साथ 17 बार मुठभेड़ हुई। अप्रैल 2025 में इनमें से तीन आतंकी मारे गए थे। आईजीपी टूटी ने कहा कि हालिया कार्रवाई इस लंबे अभियान का निर्णायक चरण था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्ला को मार गिराया गया। उन्होंने कहा कि किश्तवाड़ में आतंकियों के नेतृत्व को समाप्त कर दिया गया है, हालांकि उनके सहयोगी अन्य क्षेत्रों में अब भी सक्रिय हो सकते हैं। अनुमान के अनुसार जम्मू क्षेत्र में करीब 20 विदेशी आतंकी सक्रिय हैं।

वहीं काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एपीएस बल ने ऑपरेशन त्राशी-1 को धैर्य, स्पष्ट सोच और हर स्तर पर निर्बाध समन्वय का आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जमीन पर तैनात जवानों से लेकर कोर कमांडर, एडीजी, आईजी और डीजीपी तथा आर्मी कमांडर तक सभी स्तरों पर तालमेल रहा। उपलब्ध सभी संसाधनों का संयुक्त और एकीकृत तरीके से उपयोग किया गया, जिसमें एक डॉग से लेकर ड्रोन तक शामिल रहे।

मेजर जनरल एपीएस बल ने बताया कि यह अभियान 14 जनवरी को किश्तवाड़ में शुरू हुआ। 18 जनवरी को पहली बार आतंकियों के ठिकाने का पता चला। इसके बाद 22 जनवरी, 25 जनवरी, 31 जनवरी, 4 फरवरी और 8 फरवरी को भी मुठभेड़ हुई। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों को बर्फबारी, बारिश और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। थकान से बचाने के लिए जवानों की नियमित अदला बदली की गई। कुछ दलों को हेलीकाप्टर से उतारा गया तो कुछ ने 6 से 8 घंटे की पैदल चढ़ाई कर इलाके में प्रवेश किया।

उन्होंने बताया कि 4 फरवरी को कमांडर के सहयोगी आदिल के मारे जाने से अभियान को पहली महत्वपूर्ण सफलता मिली। 21 फरवरी को किश्तवाड़ के एसएसपी से मिली एक महत्वपूर्ण सूचना को 9 सेक्टर के ब्रिगेडियर तक पहुंचाया गया और कई एजेंसियों से इसकी पुष्टि की गई। इसके बाद दुर्गम पहाड़ों में संयुक्त अभियान चलाया गया। विशेष बलों सहित अतिरिक्त टुकड़ियां तुरंत तैनात की गईं। आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सेना ने रियल टाइम निगरानी ड्रोन और नाइट विजन उपकरणों का इस्तेमाल किया।

मेजर जनरल बल ने कहा कि इस पूरे अभियान में सेना को कोई मानवीय क्षति नहीं हुई, सिवाय बहादुर टॉयसन के घायल होने के। तलाशी अभियान के दौरान अब तक तीन एके 47 राइफल सहित युद्ध जैसे साजो सामान और मारे गए आतंकियों के शव बरामद किए गए हैं। देखा जाये तो ऑपरेशन त्राशी-1 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ पूरी तैयारी, रणनीति और साहस के साथ डटे हैं और इस बार जीत की कहानी में एक मूक लेकिन साहसी योद्धा टॉयसन का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।

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