उद्धव-राज करीब आ रहे तो महाराष्‍ट्र में कांग्रेस का एकला चलो राग, किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

By अभिनय आकाश | Jul 01, 2025

महाराष्ट्र की अस्थिर राजनीति एक बार फिर टकराव के लिए तैयार है, इस बार विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में। राज्य सरकार की हालिया शिक्षा नीति के आधार पर हिंदी लागू करने के विवाद को लेकर प्रमुख सहयोगी दल शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे द्वारा अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की एमएनएस के साथ गर्मजोशी दिखाने के हालिया घटनाक्रम के बाद। एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) प्राथमिक स्कूल शिक्षा में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी लागू करने के प्रस्तावित प्रस्ताव का मुखर विरोध कर रहे हैं।

ठाकरे भाई सुलह कर रहे हैं?

जब से राज्य की राजनीति में हिंदी भाषा विवाद ने केंद्र में जगह बनाई है, तब से उद्धव और ठाकरे दोनों ही इसके खिलाफ एक ही तरह से बोल रहे हैं और संयुक्त विरोध का आह्वान भी कर रहे हैं, जिससे राज्य में नगर निकाय चुनावों में संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने पहली बार एक संयुक्त पत्र जारी किया। यह पत्र मराठी समुदाय को संबोधित है। इस पत्र के माध्यम से उद्धव और राज ने मराठी लोगों को 5 जुलाई को होने वाली जनसभा में शामिल होने का न्योता दिया है।

कांग्रेस अलर्ट मोड पर

मराठी मानुस मुद्दे पर ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने से चिंतित, एमवीए में उद्धव की पार्टी की सहयोगी कांग्रेस अब बीएमसी चुनाव अपने दम पर लड़ने के विकल्प पर विचार कर रही है, सूत्रों ने बताया। इससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुंबई में एमवीए गठबंधन टूट सकता है। कांग्रेस ने अब मुंबई कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया है। ज्यादातर नेताओं का मानना ​​है कि ठाकरे गुट के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना पार्टी की संभावनाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। उन्हें लगता है कि कांग्रेस को मुंबई में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए।

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