यूक्रेन संकट: पश्चिम ने रूस से बंद नहीं की कच्चे तेल की खरीद, लेकिन भारत पर व्यापार प्रतिबंधित करने के लिए बना रहा है दबाव

By टीम प्रभासाक्षी | Mar 19, 2022

अमेरिका और पश्चिमी देश भारत पर रूस व्यापार प्रतिबंधित करने और यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने के लिए दबाव डाल रहा है। हालांकि इन सबके बीच यूरोपीय देशों ने रूसी तेल और गैस की खरीद जारी रखी है।

 सूत्रों ने कहा कि रूसी तेल/ गैस विभिन्न देशों, विशेषकर यूरोप द्वारा प्राप्त किया जा रहा है। रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 75% ओआईसीडी यूरोप को है। यूरोपीय देश जैसे ( नीदरलैंड, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, लिथुआनिया, रोमानिया) भी रूसी कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत के वैध ऊर्जा लेन-देन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेल निर्भरता वाले देश या जो स्वयं रूस से आयात करते हैं, वे विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत बिल्कुल भी नहीं कर सकते। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% आयात करना पड़ता है। गौरतलब है कि किफायती रूसी तेल समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिका ने मंगलवार को कहा था कि भले ही भारत अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं करेगा, लेकिन यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इतिहास के गलत पक्ष में डाल देगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत कच्चे तेल का अधिकांश आयात पश्चिम एशिया (इराक 23%, सऊदी अरब 18%, संयुक्त अरब अमीरात 11%) से करता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहना होगा। हम सभी निर्माताओं को ऐसे प्रस्तावों का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं। अमेरिका भी अब भारत का (7.3%) के साथ कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। चालू वर्ष में अमेरिका से आयात में काफी वृद्धि होने की संभावना है।

यूक्रेन संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में उछाल ने हमारी चुनौतियों को बढ़ा दिया है। प्रतिस्पर्धी सोर्सिंग के लिए दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ गया है। भारत के लिए रूस कच्चे तेल का मामूली आपूर्ति करता रहा है( हमारी जरूरत से 1% से भी कम) स्पष्ट कारणों से हमें ईरान और वेनेजुएला से सोर्सिंग बंद करनी पड़ रही है। सूत्रों ने कहा कि वैकल्पिक स्रोत अक्सर उच्च लागत पर आते हैं, ऐसी में रूस ने अपने कच्चे तेल को सस्ते में बेचने और बीमा और परिवहन की लागत वहन करने की पेशकश की थी। इसके बाद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन नि मई डिलीवरी के लिए व्यापारी विटोल के साथ 30 लाख बैरल रूसी यूराल के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए।

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