By अभिनय आकाश | Oct 29, 2026
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, जिसमें क्यूबा पर लगे अमेरिकी आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की गई है। इसमें इन प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया गया है, ताकि कैरेबियाई देश अपने विकास लक्ष्यों को हासिल कर सके। 193 सदस्य देशों वाली महासभा ने बुधवार को इस प्रस्ताव को अपनाया। इसमें 130 देशों ने पक्ष में, 17 ने विरोध में वोट दिया, जबकि 25 देश मतदान से दूर रहे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने भारत की ओर से बयान देते हुए कहा कि महासभा ने बार-बार इन प्रतिबंधों को खत्म करने की मांग की है। साथ ही, महासभा ने ऐसे कानूनों और नियमों को भी खारिज किया है, जिनका असर देश की सीमाओं के बाहर तक होता है और जो अन्य देशों की संप्रभुता तथा वहां के लोगों की प्रगति और समृद्धि पर बुरा असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के अनुरूप, सभी देशों से महासभा की उस अपील को दोहराता है कि वे ऐसे कानूनों और उपायों को लागू करने से बचें, और जो पहले से लागू हैं उन्हें निरस्त या अमान्य करें।
नायर ने कहा क्यूबा को ईंधन निर्यात पर लगे प्रतिबंधों ने देश के मौजूदा ऊर्जा संकट को और बढ़ा दिया है। इस कमी ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, जल आपूर्ति, खाद्य वितरण और परिवहन सहित आवश्यक सेवाओं को बाधित कर दिया है। अमेरिका और क्यूबा के बीच संघर्ष की जड़ें दशकों पुराने राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक मतभेदों में हैं। इसकी शुरुआत 1959 में हुई, जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया और क्यूबा को सोवियत संघ के करीब ले गए। वाशिंगटन ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बनाने के लिए छह दशकों से भी अधिक समय से उस पर कड़े व्यापार प्रतिबंध और आर्थिक पाबंदियां लगा रखी हैं। क्यूबा इन प्रतिबंधों को अपनी अर्थव्यवस्था की बदहाली, ईंधन की गंभीर कमी, बिजली कटौती और व्यापक गरीबी का जिम्मेदार ठहराता है। क्यूबा के खिलाफ अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की आवश्यकता शीर्षक वाला प्रस्ताव, अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रति संयुक्त राष्ट्र महासभा के लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दर्शाता है। हालांकि, इस प्रकार के महासभा के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते हैं।