भारत के लिए क्या, न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा? विदेश मंत्री क्यों कर रहे विरोध, 15 साल में कैसे आएगा $20 अरब का निवेश, समझें FTA डील का पूरा गणित

By अभिनय आकाश | Dec 23, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह का प्लान चला है दुनिया के साथ काफी बड़ा झटका लगा है। और समझ नहीं आ रहा कि जो हमारा एक्सपोर्ट अमेरिका जाता था अब उसका क्या होगा। तो इसकी वजह से हम ज्यादा एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन करना चाहते हैं। भारत सरकार को एक चीज तो रियलाइज हो चुका है कि हमें ज्यादा से ज्यादा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करना पड़ेगा जितना ज्यादा देशों के साथ हम कर सकें। ऐसे में अमेरिकी नीतियो की वजह से दबाव का सामना कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए न्यूजीलैंड के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता राहत की खबर है। हाल में कई दूसरे देशों के साथ भी सहमति बनी है। ये समझौते अमेरिकी टैरिफ विवाद से बने नकारात्मक माहौल को दूर करने में तो मदद करेंगे ही, इनसे वॉशिंगटन के साथ प्रस्तावित डील में भी नई दिल्ली का पक्ष भारी रहेगा।

न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा?

न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस, ऊन, कोयले और लकड़ी के सामान पर टैक्स नहीं लगेगा। कीवी, वाइन, चेरी, एवोकैडो और शहद पर भी भारत कुछ छूट देगा। वहीं, न्यूजीलैंड में विरोध शुरू हो गया है।

किसानों का फायदा ?

भारत ने डेयरी सेक्टर को इस डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है। भारत दूध, क्रीम, दही और पनीर जैसे सामानों पर कोई छूट नहीं देगा। प्याज, चना, मटर, चीनी और गहनों को भी इस लिस्ट से बाहर रखा गया है ताकि देश के व्यापारियों को नुकसान न हो।

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न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ने किया विरोध

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने हाल ही में हुए भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने इसे 'न तो फ्री औरही फेयर' बताया है और चेतावनी दी है कि यह 'न्यूजीलैंड के लिए एक खराब डील' है, जो लेती बहुत ज्यादा है और बदले में बहुत कम देती हैन्यूजीलैंड फर्स्ट 'अफसोस के साथ' इस एग्रीमेंट के खिलाफ हैयह इमिग्रेशन और इन्वेस्टमेंट पर 'गंभीर रियायतें' देता है, जबकि न्यूजीलैंड के मुख्य एक्सपोर्ट सेक्टर, खासकर डेयरी के लिए सार्थक फायदे हासिल करने में नाकाम रहता है

एफटीए से भारत को होने वाले 7 बड़े फायदे

पढ़ाई के साथ कामः न्यूजीलैंड में पढ़ाई कर रहे भारतीयों को 3 साल का वर्क वीसा। पहली बार किसी एफटीए में पढ़ाई के दौरान काम, इसके बाद नौकरी और प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी को कानूनी हक दिया गया है। भारतीय छात्र हफ्ते में 20 घंटे काम कर सकेंगे। पहले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के साथ काम की अनुमति तो थी, लेकिन वह इमिग्रेशन पॉलिसी पर निर्भर होता था। अब वहां सरकार बदलने पर भी यह सुविधा मिलेगी।

पोस्ट स्टडी वीसाः समझौते में पहली बार यह लिखा गया है कि बैचलरपीजी डिग्री धारक भारतीय तीन साल और पीएचडी वाले 4 साल काम कर सकेंगे। अभी न्यूजीलैंड में 12 हजार भारतीय पढ़ रहे हैं, जो वहां पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लगभग 14% हैं।

टेम्पररी वीसाः पहली बार 118 सर्विस सेक्टर में न्यूजीलैंड सालाना 5 हजार टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीसा जारी करेगा, जो 3 साल चलेगा। इससे आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन, कंस्ट्रक्शन, योगा इंस्ट्रक्टर को फायदा।

वर्किंग हॉलीडे वीसाः हर साल 1000 भारतीय युवा न्यूजीलैंड में 12 महीने रुककर काम कर सकेंगे। यात्रा भी कर सकेंगे।

सेब कीवी को रियायत नहीं: इनके लिए टैरिफ रेट कोटा है यानी तय मात्रा तक ही रियायती आयात। इन पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस और सीजनल विंडा जैसी सुरक्षा शर्ते भी हैं। सीजनल विंडो यानी जिस समय भारत में घरेलू सेब या कीवी की फसल बाजार में आती है, तब आयात को सीमित या रोका जा सकता है।

एग्री प्रॉडक्टिविटी एक्शन प्लानः इसके तहत न्यूजीलैंड भारत में सेब, कीवी और शहद की उत्पादकता बढ़ाने में सहयोग करेगा।

फार्मा सेक्टर: न्यूजीलैंड फार्मा और मेडिकल: डिवाइसेज के लिए भारत के जीएमपी और जीसीपी रिपोर्ट्स को मान्यता देगा। इससे डुप्लीकेट इंस्पेक्शन कम होंगे, लागत घटेगी और एक्सपोर्ट बढ़ेगा।

अमेरिका से क्या हुआ ?

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (ट्रेड पैक्ट) को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है अब यह अपने आखिरी चरण में है। पीयूष गोयल ने यह बात भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते के पूरा होने के मौके पर मीडिया से कही। उन्होंने बताया कि भारत ने फाइव आइज ग्रुप के तीन सदस्यों ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन (UK) और न्यूजीलैंड के साथ समझौते फाइनल कर लिए हैं। फाइव आइज पांच देशों का मंच है।

न्यूजीलैंड में भारतीय आबादी तीसरी ताकत

न्यूजीलैंड में अभी 2.92 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हैं। न्यूजीलैंड में भारतीय निवेश महज 1700 करोड़ रु. का है, जबकि भारत में न्यूजीलैंड का निवेश 23 हजार करोड़ का है। दोनों के बीच करीब 21 हजार करोड़ रुपए का द्विपक्षीय व्यापार है। भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया, यूके और न्यूजीलैंड के साथ एफटीए कर चुका है। ये तीनों 'फाइव आईज' इंटेलिजेंस नेटवर्क के सदस्य हैं। अमेरिका और कनाडा के साथ भी बातचीत चल रही है।

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