By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 05, 2026
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर यूनेस्को ने कहा है कि शिक्षण पेशा डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, समावेशन, प्रवासन और विस्थापन से जुड़ी नयी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके साथ ही, 2030 तक सभी बच्चों को पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दुनिया को पांच करोड़ अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत है। विश्व शिक्षक दिवस पर सोमवार को जारी यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 10.7 करोड़ शिक्षक हैं और शिक्षकों की स्थिति में सुधार के उपाय तलाशना जरूरी है, ताकि कल के शिक्षित नागरिक सुनिश्चित किए जा सकें।
वर्ष 2030 तक शिक्षकों की मांग का 58 प्रतिशत हिस्सा पेशा छोड़ने वाले शिक्षकों की जगह नए शिक्षकों की भर्ती से पूरा करना होगा।’’ रिपोर्ट के अनुसार, शोध से पता चलता है कि जिन शिक्षा प्रणालियों में शिक्षकों को बनाए रखने की दर बेहतर होती है और छात्रों के नतीजे अच्छे होते हैं, वहां शिक्षकों को सार्वजनिक विमर्श और नीतिगत प्रतिबद्धताओं, दोनों स्तरों पर कुशल पेशेवर और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले के रूप में महत्व दिया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘शिक्षक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जलवायु परिवर्तन, समावेशन एवं लैंगिक समानता, पलायन, विस्थापन तथा विभिन्न प्रकार के संकटों और आपात स्थितियों के कारण हो रहे बड़े बदलावों के बीच अपनी भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा प्रणालियां तेजी से हो रहे सामाजिक, तकनीकी और पर्यावरणीय बदलावों के अनुरूप खुद को ढाल रही हैं।’’ इसमें कहा गया, ‘‘ऐसे में शिक्षकों की भूमिका निभाने की क्षमता केवल शिक्षा में निवेश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस पेशे को मिलने वाली मान्यता, सहयोग और कामकाजी परिस्थितियां भी इसकी प्रतिष्ठा और आकर्षण को प्रभावित करती हैं।’’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर शिक्षकों के पेशा छोड़ने की वार्षिक दर फिलहाल पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में 7.2 प्रतिशत, प्राथमिक शिक्षा में 4.7 प्रतिशत और माध्यमिक शिक्षा में 5.4 प्रतिशत है।
यूनेस्को द्वारा विश्लेषण किए गए 68 में से 27 देशों में सभी शैक्षणिक स्तरों पर शिक्षकों का वेतन समान योग्यता वाले अन्य पेशेवरों की तुलना में कम है। प्राथमिक शिक्षा में वैश्विक स्तर पर एक शिक्षक पर लगभग 28 विद्यार्थी हैं।