इस बार का आम बजट देखकर लोग ईमानदारी से आयकर भरने लगेंगे !

By नीरज कुमार दुबे | Jun 11, 2019

ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन और कर चोरों पर शिकंजा कसने की दिशा में मोदी सरकार और आगे कदम बढ़ा रही है। अपने पिछले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक बार भी आयकर की दरों को नहीं बढ़ाया बल्कि पांचवें वर्ष में पेश किये गये अंतरिम बजट में पांच लाख रुपए तक की आय होने पर करदाताओं को कर से पूरी तरह छूट प्रदान कर दी। अब जब मोदी नये उत्साह, विश्वास और ज्यादा सीटों की संख्या की ताकत के साथ सत्ता में आये हैं तो वह ईमानदारी की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश को पहली बार एक महिला वित्त मंत्री मिली हैं तो उम्मीदें और भी ज्यादा बढ़ गयी हैं। पांच जुलाई 2019 को जब वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी तो पूरे देश की नजरें उन पर बनी रहेंगी। वित्त मंत्री को सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती गैर-निष्पादित परिसंपत्ति, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की चुनौतियां, रोजगार सृजन, निजी निवेश, निर्यात में सुधार, कृषि संकट तथा सरकारी निवेश में वृद्धि जैसी चुनौतियों पर राजकोषीय स्थिति पर असर डाले बिना काम करना होगा।

आप भी दीजिये बजट पर सुझाव

माना जा रहा है कि इस बार के बजट में किसानों पर तो फोकस होगा ही साथ ही मध्यम वर्ग को भी लुभाया जायेगा। खासकर इस बार के लोकसभा चुनावों में महिलाओं ने जिस तरह भाजपा के नेतृत्व वाले राजग का साथ दिया है उसको देखते हुए वित्त मंत्री कुछ ऐसे प्रावधान कर सकती हैं ताकि महिलाओं के पास और बचत हो सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले होने वाली परामर्श प्रक्रिया शुरू करते हुए अर्थशास्त्रियों, बैंक अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों तथा उद्योग मंडलों से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है। मुलाकातों का यह क्रम 23 जून तक चलेगा। इसके अलावा बजट पर सुझावों का सिलसिला सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की 20 जून को जीएसटी परिषद की होने वाली बैठक में भी आगे बढ़ सकता है। यही नहीं सरकार ने इस बार आम लोगों से भी बजट 2019-20 पर सुझाव मांगे हैं। यह सुझाव 20 जून तक सरकारी वेबसाइट माईजीओवी डॉट इन (mygov.in) पर भेजे जा सकते हैं। 

नये बड़े ऐलान क्या हो सकते हैं

इस बार के आम बजट में सरकार जिन नई पहलों का ऐलान कर सकती है उसके बारे में आई मीडिया रिपोर्टों पर गौर करें तो ईमानदार आयकरदाताओं को प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के साथ चर्चा का मौका दिया जा सकता है या फिर अगर आप ईमानदारी से अपना आयकर समय पर जमा करते हैं तो आपके बच्चे को स्कूल में दाखिले के समय प्राथमिकता मिल सकती है या फिर एअरपोर्ट पर चेक-इन लाइन में पहले मौका दिया जा सकता है या फिर एअरपोर्ट पर वीआईपी लाउंज में ठहरने का अवसर भी मिल सकता है। यही नहीं रिपोर्टें तो यह भी कहती हैं कि ईमानदार करदाताओं के लिए टोल नाकों पर अलग लेन से प्रवेश का मौका भी दिये जाने पर विचार हो रहा है। कुल मिलाकर प्रयास इस बात के लिए हो रहा है कि कर अदा करने और सही कर अदा करने के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता बढ़े। मोदी सरकार अपने पिछले पांच साल के कार्यकाल के दौरान भी बिना कर बढ़ाये करदाताओं की संख्या में वृद्धि कर राजस्व बढ़ाने में कामयाब रही थी। 

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कालेधन पर और कसेगा शिकंजा

जो लोग कर बचाने के लिए नकद में ज्यादा लेनदेन में विश्वास रखते हैं उन पर लगाम लगाने की भी तैयारी हो रही है। माना जा रहा है कि यदि आप साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा नकदी बैंक से निकालते हैं तो इस पर 3 से 5 प्रतिशत तक का कर लगाया जा सकता है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार बड़ी राशि के नकद लेनदेन को हतोत्साहित कर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध है। डिजिटल भुगतान से सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता का होता है और कालेधन पर लगाम लगती है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में RBI ने NEFT और RTGS पर लगने वाला शुल्क समाप्त कर दिया था। इसके अलावा लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटली ही लेनदेन करें इसके लिए ATM उपयोग पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा भी की जा रही है।

-नीरज कुमार दुबे 

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