By अनन्या मिश्रा | Jun 20, 2026
भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक दिव्य मंदिर सिंहाचलम मंदिर है। बता दें कि यहां पर भगवान नरसिंह की मूर्ति से सिर्फ 24 घंटे के लिए 'चंदन की परत' हटाई जाती है। वहीं तभी यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है। इस मंदिर को भगवान नरसिंह का घर कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।
भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को वीरता और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिरण्यकश्यपु का वध करने के बाद भगवान नरसिंह का क्रोध बेहद बढ़ गया था। ऐसे में सभी देवताओं को उनको शांत कराने का प्रयास असफल रहा।
तब भगवान नरसिंह अपने परम भक्त प्रह्लाद की प्रार्थना पर शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए थे। भगवान नरसिंह के तेज और उग्रता को कम करने के लिए उनको चंदन से शीतल रखा जाता है। यही वजह है कि वह साल भर तक चंदन से ढके रहते हैं, जिससे उनका स्वरूप सौम्य बना रहे।
चंदन की मोटी परत से ढके रहने की वजह से भगवान नरसिंह की मूर्ति शिवलिंग के आकार में दिखती है। वहीं सिर्फ अक्षय तृतीया के मौके पर ही चंदन हटाया जाता है। जिसको 'निजरूप दर्शन' या 'चंदनोत्सव' कहा जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान के असली विग्रह हो देख पाते हैं।
ऐसे में इस मंदिर में अक्षय तृतीया के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। वहीं नरसिंह जयंती के मौके पर यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं।
आमतौर पर भगवान नरसिंह के अन्य मंदिरों में आपको उनका उग्र रूप देखने को मिलेगा। लेकिन सिंहाचलम मंदिर में भगवान माता लक्ष्मी के साथ बेहद शांत और सौम्य मुद्रा में विराजमान हैं। अगर मंदिर के वास्तुकला की बात की जाए, तो इस मंदिर में चालुक्य, चोल और कलिंग शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलेगा।