Mysterious Temples: Mahabharat काल से जुड़ा है Panch Kedar का रहस्य, यहां दर्शन से मिलती है पापों से मुक्ति

Panch Kedar
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धार्मिक मान्यता है कि मुताबिक जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 स्थानों पर पांडवों द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई।

हिंदू धर्म में पंचकेदार की तीर्थयात्रा को बेहद पवित्र माना जाता है। पंच केदार की यात्रा को मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का एक आध्यात्मिक मार्ग माना गया है। पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है। पंच केदार की उत्पत्ति महाभारत काल की एक कथा से जुड़ी है। पौराणिक कथा के मुताबिक कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पापों से छुटकारा पाने के लिए पांडव हिमालय पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे। जिस कारण महादेव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए भगवान शिव बैल का रूप धारण करके धरती में लुप्त हो गए।

धार्मिक मान्यता है कि मुताबिक जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 स्थानों पर पांडवों द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई। जिसको पंच केदार के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पंच केदार और इसके महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।

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केदारनाथ

पंचकेदार में केदारनाथ मंदिर सबसे प्रमुख माना जाता है। यहां पर बैल रूपी अवतार की पीठ का हिस्सा प्रकट हुआ था। केदारनाथ को आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है और हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर आते हैं। यहां पर भगवान शिव की पूजा करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

तुंगनाथ

धार्मिक मान्यता के अनुसार तुंगनाथ में भगवान शिव का हाथ प्रकट हुआ था। यह मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया जाता है। माना जाता है कि यहां पर भगवान शिव के दर्शन से व्यक्ति को मन की शांति मिलती है।

रुद्रनाथ

रुद्रनाथ में भगवान शंकर का मुख प्रकट हुआ था। यहां पर भगवान शिव की पूजा नीलकंठ के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस मंदिर में साधना करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

मध्यमहेश्वर

मध्यमहेश्वर में भगवान शिव की नाभि प्रकट हुई थी। पांडवों ने महादेव की आराधना की थी। इसको शांति और मोक्ष का केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जो भी भक्त मध्यमहेश्वर मंदिर में स्थित भगवान शिव की पूजा करता है। उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करता है।

कल्पेश्वर

बता दें कि जहां पर कल्पेश्वर मंदिर है, उसी स्थान पर भगवान शिव की जटाएं प्रकट हुई थीं। कल्पेश्वर एक मात्र ऐसा केदार है, जिसके कपाट भक्तों के लिए पूरे साल खुले रहते हैं।

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