By कमल सिंघी | Aug 11, 2020
भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी बातें जब भी होती हैं, तब-तब मध्यप्रदेश के उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का जिक्र जरुर आता है। इसी आश्रम में भगवान कृष्ण ने 64 दिन पढ़ाई करके 64 विद्याएं और 16 कलाएं सीखी और पहले जगत गुरु बने थे। इस दौरान उनके साथ भगवान बलराम और सुदामा भी साथ पढ़ते थे। भगवान कृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि जी का आश्रम करीब 5 हजार 273 साल पुराना है। सांदीपनि आश्रम में गुरु सांदीपनि जी की मूर्ति के सामने चरण पादुकाओं के दर्शन होते हैं।
सांदीपनि आश्रम में हुआ था हरि से हर का मिलन
सांदीपनि आश्रम में ही हरि से हर का मिलन हुआ था। हरि यानी भगवान कृष्ण और हर अर्थात भोलेनाथ। श्री कृष्ण जब सांदीपनि आश्रम में पढ़ने के लिए पहुंचे तो भगवान शिव उसने मिलने गए थे। इस दौरान भगवान शिव ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के भी दर्शन किए। कहा जाता है कि यह दर्लभ क्षण था जब हरिहर का मिलन सांदीपनि आश्रम में हुआ था। उज्जैन में भगवान कृष्ण के तीन विख्यात मंदिर हैं। पहला सांदीपनि आश्रम जहां भगवान कृष्ण ने ज्ञान प्राप्त किया था। दूसरा गोपाल मंदिर है। गोपाल मंदिर की देखरेख सिंधिया राजघराना करता है और तीसरा मंदिर इस्कॉन मंदिर हैं। तीनों मंदिरों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
सांदीपनि आश्रम का नाम अंकपात भी था
सांदीपनि आश्रम का नाम अंकपात भी था। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण सांदीपनि आश्रम में स्लेट पर लिखे अंकों को धोकर मिटाते थे। इस वजह से आश्रम का नाम अंकपात भी पड़ा था। यहां गोमीकुंड भी काफी प्रसिद्ध जगह है। कहा जाता है कि 1 से 100 अंकों को एक पत्थर पर गुरु सांदीपनि ने ही अंकित किया था। कहा जाता है कि महर्षि सांदीपनि ने भगवान कृष्ण को जगत गुरु की उपाधि दी थी। यह करीब 5 हजार साल पुरानी बात कही जाती हैं। इस बारे में प्रमाण आज भी सांदीपनि आश्रम उज्जैन में मौजूद हैं।
- कमल सिंघी