अमेरिका ने बम से उड़ाया चीन-ईरान रेल ट्रैक, बीजिंग का भड़का गुस्सा

By अभिनय आकाश | Jul 10, 2026

जहां अमेरिकी मिसाइलों ने आसमान को लाल कर दिया है। अभी महज 20 दिन पहले यानी कि 17 जून को ट्रंप और ईरान ने हाथ मिलाकर यह कहा था कि अब हम नहीं लड़ेंगे। तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने नाटो की बैठक से लौटते ही ईरान के सात शहरों पर नर्क ढहा दिया। ईरान की सबसे बड़ी गलती यह रही कि वो ट्रंप की दी हुई 7 दिन की मोहलत को अपनी जीत समझ बैठा। एक तरफ थामने के जनाजे में डेथ टू अमेरिका के नारे लग रहे थे तो दूसरी तरफ ईरान ने दुनिया की लाइफ लाइन यानी कि स्ट्रेट ऑफ हॉररमूस को बंधक बनाकर 24 घंटे में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल जहाजों पर हमला कर दिया। ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा और उन्होंने कसम खा ली अब कि ईरान को तबाह कर कर ही वह दम लेंगे।  

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इस  तबाही में भारत का क्या फायदा है? 

यहां छिपा है असली जियोपॉलिटिकल ट्विस्ट। चीन का सिल्क रूट दफन। चीन इस रेल मार्ग के जरिए भारत को घेरकर मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया का बेताज बादशाह बनना चाहता था। अमेरिका ने इस रूट को तोड़कर चीन के अरबों डॉलर के वन बेल्ट वन रोड यानी कि ओबीओआर प्रोजेक्ट का कबाड़ा कर दिया है। अब भारत बनेगा ग्लोबल ट्रेड का किंग। ईरान ने हताशा में भारत के निवेश वाले चाबार पोर्ट पर हमला तो किया लेकिन चीन का रास्ता बंद होने के बाद अब पूरी दुनिया के पास मिडिल ईस्ट और यूरोप तक व्यापार करने का सिर्फ एक ही सुरक्षित रास्ता बचेगा और यह रास्ता कौन सा है? भारत का आईएमईसी यानी कि इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर। अमेरिका और पश्चिमी देश अब अपनी पूरी ताकत भारत के इस रूट को खड़ा करने और सुरक्षित करने में झोंक देंगे। यानी चीन का पत्ता साफ और भारत के लिए ग्लोबल ट्रेड का एक नया रास्ता खुल गया है। 

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