By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 10, 2026
अमेरिका में नौकरी छूटने के बाद रोजगार तलाशने वाले एच1 बी वीजा धारकों के लिए 60 दिन की ग्रेस अवधि समाप्त करने के प्रस्ताव से बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन होगा और खासकर भारत से आने वाले अत्यधिक कुशल पेशेवरों की संख्या में कमी आएगी। विशेषज्ञों ने यह आशंका जताई है। एच1 बी रोजगार वीजा के सबसे बड़े लाभार्थियों में भारतीय नागरिक शामिल हैं।
पांडेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस अवधि के बिना कर्मचारियों को इस बात के लिये प्रोत्साहन मिलेगा कि नई याचिका दाखिल होने या मंजूर होने तक वह अपने मौजूदा नियोक्ता को इसकी जानकारी न दे। इसका मतलब है कि मौजूदा नियोक्ता को बेहद कम समय के नोटिस पर पता चलेगा कि वह अपनी टीम के एक सदस्य को खो रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका असर जितना कर्मचारियों पर पड़ेगा उतना ही अमेरिकी नियोक्ताओं पर भी फर्क पड़ेगा।’’ भूटोरिया ने गृह विभाग की प्रस्तावित नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘60 दिन की ग्रेस अवधि खत्म करना अमानवीय और अव्यावहारिक है।
जब किसी कर्मचारी को अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है, तब 60 दिन की अवधि पहले से ही बेहद कम होती है। इसको पूरी तरह खत्म करने से कानून का पालन करने वाले हजारों लोगों के पास यहां की अपनी जिंदगी को समेटने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं बचेगा’’ भूटोरिया ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के सलाहकार के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ग्रेस अवधि को 60 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने इसके पीछे कॉरपोरेट क्षेत्र में भर्ती की वास्तविक प्रक्रिया का हवाला दिया था, जहां तकनीकी साक्षात्कार के विभिन्न चरण और वीजा ट्रांसफर से जुड़ी कागजी कार्रवाई पूरी होने में अक्सर कई महीने लग जाते हैं।