US Job Cuts 2026 | अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर युद्ध की मार! फरवरी में 92,000 नौकरियों की कटौती, बेरोजगारी दर बढ़कर हुई 4.4%

By रेनू तिवारी | Mar 07, 2026

अमेरिकी श्रम बाजार से आए ताजा आंकड़ों ने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को चिंता में डाल दिया है। श्रम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी महीने में अमेरिकी नियोक्ताओं ने अप्रत्याशित रूप से 92,000 नौकरियों में कटौती की है। यह गिरावट न केवल अनुमानों से कम है, बल्कि यह संकेत देती है कि ईरान के साथ जारी युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। श्रम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में नियुक्तियों की स्थिति जनवरी के मुकाबले खराब रही। जनवरी में कंपनियों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों ने 1,26,000 नौकरियां जोड़ी थीं।

अर्थशास्त्रियों ने फरवरी में 60,000 नयी नौकरियों की उम्मीद जताई थी। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर और जनवरी के पेरोल से भी 69,000 नौकरियां कम कर दी गई हैं। फरवरी में रोजगार की यह कमजोर स्थिति ईरान के साथ युद्ध के कारण पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता को दर्शाती है। इस युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में उछाल आया है और व्यवसायों एवं उपभोक्ताओं पर अप्रत्याशित लागत का बोझ बढ़ा है।

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नेवी फेडरल क्रेडिट यूनियन की मुख्य अर्थशास्त्री हेदर लॉन्ग ने कहा, नौकरी का बाजार कई विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा है। कंपनियां इस वसंत में तब तक भर्ती करने में हिचकिचाएंगी जब तक कि युद्ध समाप्त नहीं हो जाता। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है। वर्ष 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीतियों और उच्च ब्याज दरों के कारण रोजगार बाजार सुस्त रहा था।

जनवरी की बेहतर नियुक्तियों के बाद 2026 में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन ताजा रिपोर्ट ने उन उम्मीदों को झटका दिया है। फिंच रेटिंग्स में अमेरिकी अर्थशास्त्र के प्रमुख ओलू सोनोला के अनुसार, जब ऐसा लग रहा था कि श्रम बाजार स्थिर हो रहा है, तभी इस रिपोर्ट ने उस धारणा को धराशायी कर दिया है। यह हर लिहाज से बुरी खबर है। ईरान के साथ युद्ध के कारण रोजगार बाजार और पूरी अर्थव्यवस्था का परिदृश्य अनिश्चितता के बादलों से घिरा हुआ है।

रेमंड जेम्स के मुख्य अर्थशास्त्री यूजीनियो अलेमान ने कहा, मौद्रिक नीति के लिए यह संभवतः सबसे खराब परिदृश्य है। उनके अनुसार, कम नियुक्तियों और मुद्रास्फीति (महंगाई) के बढ़ते दबाव ने फेडरल रिजर्व के सामने एक अत्यंत कठिन स्थिति पैदा कर दी है, जहां उसे यह तय करना होगा कि रोजगार बाजार को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाए या कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उन्हें मौजूदा स्तर पर ही रखा जाए।

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