US Court ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के Visa नियमों पर लगाई अंतरिम रोक

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 15 सितंबर अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने विदेशी विद्यार्थियों और पत्रकारों के अमेरिका में पढ़ाई या काम करने की समयसीमा पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए नियम पर अंतरिम रोक लगा दी है। मैसाचुसेट्स जिला न्यायाधीश के सोमवार को आए इस फैसले से भारतीय छात्रों सहित अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह आदेश नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले जारी किया गया।

अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहने तक प्रारंभिक स्थगन आदेश के जरिए नए नियम के कार्यान्वयन को रोक दिया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता लगभग 600 सार्वजनिक और निजी संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन अमेरिका में 5,000 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान हैं। न्यायाधीश सेलोर ने फैसला दिया कि केवल संबंधित पक्षों तक राहत को सीमित रखने के लिए समानांतर नियामक व्यवस्था बनाए रखनी होगी और बार-बार यह निर्धारित करना पड़ेगा कि कोई विशेष छात्र या संस्थान इस आदेश के दायरे में आता है या नहीं, जिससे परस्पर विरोधी फैसले आ सकते हैं।

जुलाई में ट्रंप प्रशासन के जिस नियम को अंतिम रूप दिया गया था, उसमें छात्र और ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ के लिए चार साल की समय-सीमा तय की गई है। ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ अमेरिका का एक प्रकार का गैर-आप्रवासी वीजा है, जो ऐसे लोगों को दिया जाता है जो शैक्षणिक, सांस्कृतिक या पेशेवर कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आते हैं। इसके अलावा, चीन को छोड़कर अन्य देशों के पत्रकारों के वीजा के लिए 240 दिन की सीमा निर्धारित की गई थी।

अब स्थगित हो चुके इस नियम के अनुसार चीन के मीडियाकर्मियों के लिए जारी वीजा की अवधि 90 दिन की तय की गई है। ये नए नियम मंगलवार से लागू होने थे। इस नियम के तहत छात्रों और पत्रकारों को वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करने की अनुमति तो थी, लेकिन इसकी मंजूरी पूरी तरह से गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के विवेक पर निर्भर थी और अवधि बढ़ाने के आवेदन के खारिज होने पर अपील करने का कोई प्रावधान नहीं था।

मुख्य रूप से उच्च शिक्षा क्षेत्र और श्रमिक यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने नियम को रद्द करने का अनुरोध करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन एम. गार्बर ने जुलाई में कहा था, ‘‘एक सामान्य पीएचडी कार्यक्रम में आमतौर पर कम से कम छह साल लगते हैं, इसलिए वीजा की अवधि घटाकर चार साल करना थोड़ा अजीब है।’’ दूसरी ओर, गृह सुरक्षा विभाग का कहना था कि ऐसा करके धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और लोगों को वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने से रोकने में मदद मिलेगी।

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