Prabhasakshi Exclusive: US-Japan-South Korea ने Camp David Summit में जो सुरक्षा समझौता किया है उसका उद्देश्य क्या है?

By नीरज कुमार दुबे | Aug 18, 2023

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान मिलकर रक्षा-सुरक्षा के लिए जो नये उपाय करने जा रहे हैं उसके उद्देश्य क्या हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सरेआम तानाशाह करार दे चुके हैं और अब वह चीन को घेरने के लिए तमाम देशों के साथ अलग-अलग मंच बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगले साल बाइडन को भी राष्ट्रपति चुनाव का सामना करना है इसलिए वह चीन पर दबाव बनाकर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कैंप डेविड में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के दौरान जापान और दक्षिण कोरिया के साथ एक नए मजबूत तीन-तरफा गठबंधन को मजबूत करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि इससे जापान और दक्षिण कोरिया जैसी दो एशियाई शक्तियों के बीच पीढ़ियों से चले आ रही दुश्मनी को खत्म कर तेजी से मुखर हो रहे चीन के सामने त्रि-शक्ति की चुनौती पेश की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह बाइडन की बड़ी कामयाबी है कि वह जापान और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों में सुधार ला पा रहे हैं। उन्होंने कि अमेरिका तो लंबे समय से जापान और दक्षिण कोरिया के साथ जुड़ा हुआ है लेकिन कोरियाई प्रायद्वीप पर जापान के 35 साल के क्रूर कब्जे से टोक्यो और सियोल के बीच ऐतिहासिक दुश्मनी चली आ रही थी। उन्होंने कहा कि बाइडन जापान और दक्षिण कोरिया को यह समझाने में सफल रहे हैं कि असली खतरा एक दूसरे से नहीं बल्कि चीन से है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि माना जा रहा है कि तीनों देशों के बीच जो सुरक्षा समझौता हो रहा है वह नाटो संधि के अनुच्छेद 5 तक नहीं जायेगा, जो सहयोगियों को किसी भी सदस्य पर हमले की स्थिति में "कार्रवाई करने" के लिए बाध्य करती है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह सुरक्षा समझौता यह उम्मीद करेगा कि मुश्किल घड़ी में तीनों मिलकर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इस समझौते के तहत तीनों देश रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे, वार्षिक तीन-तरफ़ा सैन्य अभ्यास का विस्तार करेंगे और दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत द्वीपों में सुरक्षा सहायता के लिए एक रूपरेखा बनाएंगे। इसके अलावा तीनों देश पहली त्रिपक्षीय हॉटलाइन भी शुरू करेंगे ताकि नेता किसी संकट की स्थिति में सुरक्षित रूप से संवाद कर सकें।

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