By रेनू तिवारी | Jul 15, 2026
अमेरिका और इराक के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दोनों देशों के अधिकारियों ने आधिकारिक घोषणा की है कि अमेरिकी सेना सितंबर 2026 के अंत तक इराक से पूरी तरह से हट जाएगी। इस फैसले के साथ ही साल 2003 में इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू हुए अमेरिकी सैन्य अभियान का लगभग 23 वर्षों का सफर समाप्त हो जाएगा। हाल के वर्षों में इराक में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका केवल आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ सीमित अभियानों तक ही सिमट कर रह गई थी।
प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने दुभाषिए के माध्यम से कहा, ‘‘30 सितंबर तक अमेरिकी सेनाएं इराक से बाहर हो जाएंगी, जबकि अमेरिकी कंपनियां इराक में निवेश और कारोबार करती रहेंगी।’’ अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने बाद में एक बयान में कहा कि वह 2024 में इराक के साथ हुए उस समझौते की पुष्टि कर रहा है, जिसके तहत इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मिशन को समाप्त किया जाना था। इस समझौते के बाद उस समय इराक में तैनात अधिकांश अमेरिकी सैनिक पहले ही वापस लौट चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान की जिम्मेदारी अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं से हटाकर धीरे-धीरे इराकी सुरक्षा बलों को सौंपनी शुरू कर दी थी।
अमेरिकी सेना द्वारा प्रशिक्षित इराकी सैनिक अब सुरक्षा अभियानों की अगुवाई कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी सैनिक लगातार विभिन्न ठिकानों से हटते गए और अपनी सैन्य मौजूदगी सीमित करते रहे। अमेरिका ने मार्च 2003 में इराक पर हमला किया था। उस समय उसने इसे ‘शॉक एंड ऑ’ नामक व्यापक बमबारी अभियान बताया था। इस अभियान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए, जिनसे इराक के कई हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा और बाद में अमेरिकी जमीनी सेना ने राजधानी बगदाद में प्रवेश किया। यह सैन्य अभियान इस दावे के आधार पर शुरू किया गया था कि तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने बड़े पैमाने पर विनाश फैलाने वाले हथियार छिपाकर रखे हैं। हालांकि बाद में ऐसे किसी भी हथियार का कोई प्रमाण नहीं मिला।
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