अधिकारियों की कारगुजारी के चलते योगी का जनसुनवाई पोर्टल तोड़ रहा है दम

By स्वदेश कुमार | Dec 02, 2019

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी उम्मीदों के साथ जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए 'जनसुनवाई' पोर्टल शुरू किया था। योगी को उम्मीद थी कि जब अधिकारियों को इस बात का अहसास रहेगा कि जनता की शिकायतों पर अधिकारी क्या कार्रवाई कर रहे हैं, इस पर सीएम साहब की सीधी नजर है तो अधिकारी जन समस्याओं का निस्तारण पूरी ईमानदारी से करेंगे। लेकिन योगी के अधिकारियों ने उनकी उम्मीदों को ठेंगा दिखाकर 'तू डाल−डाल तो मैं पात−पात' की कहावत को सही साबित कर दिया है। हालत यह है कि जनसुनवाई के नाम पर आवदेक की शिकायत को अधिकारी एक से दूसरे अधिकारी को अग्रसारित करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं और अंत में बिना किसी ठोस कार्रवाई के शिकायत को 'निस्तारित' दिखा दिया जाता है। इससे न केवल विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है बल्कि जनता का मुख्यमंत्री से विश्वास भी उठता जा रहा है। जनसुनवाई पोर्टल में आने वाली शिकायतों पर अधिकारियों द्वारा गंभीरता से कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ समय पूर्व इसकी समीक्षा भी की थी।

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बात यहीं तक सीमित नहीं थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह भी चेताया था कि सी श्रेणी प्राप्त कर पुनर्जीवित हुए संदर्भों के मुकाबले आई आख्याएं भी अधिक संख्या में कार्यवाही के लिए लंबित हैं। ऐसे में इन लंबित मामलों का नियमानुसार जल्द समाधान कराया जाए। इस संबंध में संबंधित अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिवों को पत्र भेजा गया। असल में इस मामले में हर जिले का हर महीने परफार्मेंस का आकलन किया जाता है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तमाम जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस कप्तान व विभागों के प्रमुख सचिवों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में सबसे ज्यादा नाराजगी समस्याओं के समाधान तय समय में न होने पर जताई थी। उन्हें कई ओर से फीडबैक मिला था कि शिकायतों के निपटारे में न केवल जिला स्तर पर बल्कि विभागों के स्तर पर भी लापरवाही हो रही है।

इसको उदाहरणों से समझा जा सकता है। योगी सरकार के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल 'जनसुनवाई' पर झूठी रिपोर्ट देकर फर्जी निस्तारण किए जा रहे हैं। अब घपले−घोटालों के लिए चर्चित स्वास्थ्य विभाग में ऐसा ही मामला सामने आया है। अलीगढ़ में कॉपर−टी के लिए घूस लेने की आरोपित डॉक्टर के खिलाफ चार बार पोर्टल पर शिकायत हुई। विभाग ने डॉक्टर को मूल तैनाती स्थल चंडौस सीएचसी पर दोबारा भेजने की झूठी रिपोर्ट दी। जबकि, उसे अनुरोध पर शहर की ही दूसरी पीएचसी दे दी गई। पीड़ित पक्ष ने पुनः इस फर्जीवाड़े की पोर्टल पर शिकायत की। जब इस संबंध में सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल से पूछा गया तो उनका कहना था कि डॉ. जमाल की संबद्धता खत्म कर दी गई है। वे केके जैन पीएचसी के कैंपस में ही रहती हैं। कोई कुछ भी आरोप लगा सकता है। ऐसी कोई परिस्थिति रही होगी कि उन्हें पीपीसी सेंटर पर पुनः संबद्ध करना पड़ा।

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इस संबंध में लखनऊ से जुडी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया जा सकता है। तीन महीने पहले बिजली कनेक्शन की अर्जी देने के बावजूद पांच घर आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर है। एक घर में तो मांगलिक कार्यक्रम (शादी) है जो उसे जनरेटर लगाकर करना पड़ रहा है। मामला लखनऊ के चिनहट के देवा रोड स्थित हिन्द सिटी के पांच घरों में विद्युत आपूत्ति से जुड़े आवेदन का है। इन पांच घरों के मालिकों से विद्युत विभाग ने कनेक्शन देने के नाम पर सड़सठ हजार एक सौ इक्यावन पये (67151) वसूलने के बाद भी कनेक्शन अभी तक नहीं दिया है। मजबूरन इन घरों के लोग विद्युत कनेक्शन के अभाव में अपने मांगलिक काम (शादी) जनरेटर का सहारा लेकर कर रहे हैं। पैसा जमा होने के दो माह बाद कॉलोनी में सिर्फ चार पोल लगा पाए हैं। प्रत्येक पोल पर बॉक्स बांधकर उस पर एबीसी लाइन भी खींच दी गयी। इतना कुछ होने के बाद विभाग अब इसे गलत बता रहा है। आवेदक बीते बीते तीन माह से पॉवर हाउस के चक्कर काट रहे हैं। पांच में से एक मकान में शादी है। चिनहट देवा रोड पर हिंद सिटी कॉलोनी में रामाकांत शुक्ला, जयनारायण सिंह, रीता श्रीवास्तव, प्रियंका जौहरी व रेखा चौधरी का मकान है। मकान में बिजली का कनेक्शन लेने के लिए उन्होंने अगस्त माह में देवा रोड स्थित विद्युत सबस्टेशन पर आवेदन किया था। आवेदन का भौतिक सत्यापन करने पर विभागीय अधिकारियों ने यहां 4 नये विद्युत पोल लगाने के बाद मकान में कनेक्शन देने की बात कही। आखिरकार पांच लोगों को विद्युत कनेक्शन देने के लिए विभागीय जेई ने पये 67151 का एस्टीमेट तैयार किया। 4 सितम्बर का रामाकांत शुक्ला ने बैंक ऑफ बडौदा से 67151 रुपये का डीडी (संख्या 106135) बनवाया और 5 सितम्बर को विद्युत सब स्टेशन पर जमा कर दिया। पैसा जमा होने के दो माह विभाग ने अपने ही काम को गलत बताते हुए इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पैसा जमा होने, पोल लगने व उस पर एबीसी लाइन खिंच जाने के बाद भी इस लाइन को चालू न किये जाने पर रामाकांत शुक्ला ने 16 नवम्बर को इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की। जनसुनवाई की शिकायत संख्या 40015719073385 को विभाग ने बिना कुछ किए निस्तारित बता दिया। रामाकांत शुक्ला बताते हैं कि उनके बेटे की शादी है। पूरा मकान अंधेरा में डूबा हुआ है। अब हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि हम क्या करें।

-स्वदेश कुमार

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